नवीनतम लेख/रचना

  • इतिहास

    इतिहास

    मंजिल तक तो बस वही पहुचेंगे जो सफर पर निकल पड़े रास्तों का हिसाब तो अपने ज़ज्बे कर ही लेंगे हम आखिर सपनों की मंजिल तलक बनी कोई सड़क भी तो नहीं होती इतिहास बनने से...

  • कविता : चूड़ियाँ

    कविता : चूड़ियाँ

    अभिसार में किसी के खनकती हैं चूड़ियाँ । परिणय की सेज पर तो महकती हैं चूड़ियाँ ।। जिनके कई हैं रंग, और रूप भी कई, प्रियतम नहीं हैं पास, बिलखती हैं चूड़ियाँ । आये बलम विदेश...



  • लघुकथा — फर्क़

    लघुकथा — फर्क़

    “मेरे लिए एक अच्छा-सा लेडीज सूट दिखाओ” लड़के ने दुकान में पहुंचकर कहा ! “जी साब,दिखाता हूं ! दुकानदार ने स्मार्टनेस दिखाई ! कुछ देर बात वह  लड़का  अपने घर पहुंचा , और एकांत का लाभ उठाकर घर...






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