कविता

कोंपलें

अचेतना से निकलकर भविष्य की ओर झाँकती हुई नवस्फुटित कोंपलें जीवन की सार्थकता को परिभाषित कर रही है नर होकर भी निराश मन क्यों तेरी जिंदगी मुसीबतों से डर रही है थककर हार ना मान अंदर की जीवन शक्ति को पहचान बस चलते चलते चलते चल परिस्थितियों के दलदल से अब निकल घूम कर देख […]

कविता

मैट्रो

  रोज का सफर है मैट्रो का हाँ जद्दोजहद जारी रहती है लोगों के चढने उतरने की किसी भी बखत लडने की अरे!!! लडना बाबू सीट के लिए लडना बड़े-बूढ़ों से बहस पर उतर आना जिद और भ्रम लिये बेवक्त आना बेवक्त जाना संस्कृति, संस्कारों को नहीं कभी सिंचना सभागार में अश्लीलता पर जोरदार ताली […]

कविता

कैसे

बुझती हुई लौ को जलाएं कैसे मेरा दिल है साफ ये बताएं कैसे महफिल घूमती है उनके चारों तरफ हमें इश्क है उनसे जताएं कैसे ************************* वजन ज्यादा है मेरी बातों में ये अब वजन घटाएं कैसे तोहफे है आज भी अलमारी में रखे उनको वो तोहफे लौटाएं कैसे ************************ धुआं बहुत है यादों का […]

कविता

आज का फैशन

देखो यह दीवानों तुम यह काम न करो पहन कर फटी जींस मम्मी पापा का नाम बदनाम न करो तुम्हें देख कहीं यह न समझने लगें लोग तुम भी कोई भिखारी करोड़पतियों में तो नहीं फैशन में इतने दीवाने न बनो फटी जींस पहन राजा से रंक न बनो कभी कभी ऐसा भी हो जाता […]

कविता

मकान

अभी मकान बनाया है दिल में अब जाकर मुंडेर सजानी है कहानियां लिखी हैं बहुत जो दुनिया को सुनानी है अंधेरा है शहर में चारों तरफ बुझे चेहरों से गुफ्तगू करनी है आग जो धधक रही अंदर खाली दिलों में लौ जलानी है

कविता

पिता

अपनी इच्छाओं पर अंकुश लगाकर जो तुम्हारे सपने पूरे करे तुम्हारा कलेजा इतना बड़ा कर दे कि तू किसी के सामने ना डरे वक्त के अंधेरों में जो दिया जलाए वही पूजनीय पिता कहलाए संघर्षों से बनाएं सीढियां ताकि तुम ऊपर जा सको जो सपने में सोचा है तुमने वो मुकाम तुम पा सको तुम्हारे […]

कविता

जरा

वक्त की आग में तप ने दो जरा अभी उत्पन्न हुआ हूं थोड़ा सा निखरने दो जरा युद्ध के मैदान में मैं भी आऊंगा शमशीर लेकर मुझे युद्ध कौशल में सवरने दो जरा ख्वाब है छोटा सा अंदर पलने दो जरा दोबारा आएगा सूरज अब ढलने दो जरा दुश्मन के पैंतरे काम नहीं आएंगे अब […]

हाइकु/सेदोका

शायर

तमाम बुरे हालातों में मैं कभी झुका नहीं अपनी मंजिल के रास्ते पर हूं कभी रुका नहीं दिल की महफिल अभी भी आबाद रखता हूं मैं वो शायर हूं जो कभी कहीं लूटा नहीं

कविता

इंसान बनो

जीवन भर हम खुद को मकड़जाल में उलझाए रखते हैं, सच तो यह है कि हमें बनना क्या है? ये ही नहीं समझ पाते। मृग मरीचिका की तरह भटकते रहते हैं, इंसान होकर भी इंसान नहीं रहते हैं। हम तो बस वो बनने की कोशिशें हजार करते हैं, जो हमें इंसान भी नहीं रहने देते […]

गीत/नवगीत

गीत – सिक्खी का इतिहास सुनाए प्यार वैशाखी का

दुनियां में सर्वोत्तम है त्योहार वैशाखी का सिक्खी का इतिहास सुनाए प्यार वैशाखी का। बादशाह दरवेश गुरू गोबिंद सिंह एक शक्ति। सिक्खी की बुनियादी परिभाषा में है भक्ति। इसके भीतर होता है दीदार वैशाखी का। सिक्खी का इतिहास सुनाए प्यार वैशाखी का। ख़ालसे का जन्मोत्त्सव है सर्जन पांच प्यारे। देते जैसे लौ निराली सूरज चांद […]