नवीनतम लेख/रचना



  • झाँसा

    झाँसा

    बिरजू आज मजदुरी करके रोज से कुछ पहले ही घर की ओर लौट रहा था । बाजार से बाहर निकला ही था कि श्यामू ने उसे आवाज लगायी ” बिरजू ! अरे सुन तो ! आज...

  • दर्द

    दर्द

    डूब जाने का अपना अलग ही मजा है , न समझाओ हमें बिखरते हुए ख्वाबों की तरह ! न होंगे हम तो किसको गीत सुनाओगे ! उजड़े हुए चमन से कैसे निजात पाओगे ! समंदर है...

  • सत्ता

    सत्ता

    खुद को लोकतंत्र कहने की फिक्र में परजीवी सत्ता के वृक्ष पर बैठा जनतंत्र नित्य नये तरीकों से चूसा जा रहा है बस एक ही विकल्प बाकी है कि हर पांच साल बाद डालियाँ बदलकर खुद...

  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    शब्द – साजन ,सजन,सजना ,बालम ,बलमा ,बलम आदि मापनी -१२२ ,१२२,१२२,१२२ सजन हैं हमारा नयन दिल दुलारा बलम के हृदयतल चमन चित हमारा करूँ नित्य पूजा की थाली लिए मैं सजाकर निभाकर लजाकर दिदारा॥ महातम मिश्र,...

  • कविता – यूपी से स्पेशल होली

    कविता – यूपी से स्पेशल होली

    (यूपी से स्पेशल होली की शुभकामनायें देती रंगभरी कविता) अब के पहले होली थी बस अख़बारों की होली सत्ता मद में डूबे बस कुछ परिवारों की होली सड़कें टूटीं और बनीं, ठेकेदारों की होली जातिवाद के...

  • गीत – जनता ने ऐलान सुनाया

    गीत – जनता ने ऐलान सुनाया

    (यू पी में बीजेपी की प्रचंड विजय पर तात्कालिक प्रतिक्रिया व्यक्त करती कविता) जनता ने एलान सुनाया यूपी के दरबारों को नही चुनेंगे, लोकतंन्त्र के हैवानों हत्यारों को नहीं चुनेंगे, जाति वर्ग का जाल बिछाने वालों...

  • कविता — बुतसाज

    कविता — बुतसाज

    वो बुतसाज मेरे नज़दीक आया मुझे लगा…. अब वो मुझ मे से मुझे तराशेगा…. “आह! कितना सुंदर पत्थर !” मेरे सीने पर भारी बूट के साथ अपना दाहिना पैर रखते वो चहका और सिगरेट सुलगा बाएं...

  • कविता – बादशाह का डर

    कविता – बादशाह का डर

    वो रोज़ ही मुझे देख मुस्कुराता,उछलता हाथ चूमता और फिर आगोश मे ले लेता क्योकि वो मेरे रूह और जिस्म के बेहद करीबी है… आज वो मुझे देख न मुस्कुराया न उछला बस अकबकाया और दौड़...

राजनीति

कविता