सामाजिक

पर्यटन से ही लौटेगी खुशी और मुस्कान

कोरोना महामारी ने जीवन के मायने ही बदल दिये हैं, इस महाप्रकोप के समय में हर व्यक्ति किसी-ना-किसी परेशानी से घिरा हुआ है, भय और जीवनसंकट के इस दौर में ऐसा लगता है मानो खुशी एवं मुस्कान तो कहीं गुम हो गई है। बावजूद इन सबके हर व्यक्ति को अपने जीवन में कुछ समय ऐसा […]

गीत/नवगीत

सौभाग्य जयन्ती…

नहीं है नहीं…, नहीं है नहीं…! मेरा सौभाग्य जयन्ती नहीं…, मेरा सौभाग्य जयन्ती नहीं..!! पुरखोंं का सम्पति नहीं…! मैं स्वयं दम्पति नहीं…..!! फिर क्यों न बन जाऊँ सन्यासी..! लगाऊँ मन के आश्रम में समाधि !! नहीं है नहीं… 2 मेरा सौभाग्य जयन्ती नहीं..2 मेरा मन बेईमान नहीं …! ऐसे भी जीना आसान नहीं !! साथ […]

सामाजिक

आॅनलाईन शिक्षण : बच्चों को शिक्षा से जोड़ती नवीन विधा

मानव जीवन कभी एकांगी और एकरस नहीं होता है। उसमें जीवनानुभवो के विविध पक्ष एवं इंद्रधनुषी रंग समाये होते हैं। जीवन के व्यापक फलक में स्नेह-प्रेम, शान्ति, करुणा, विश्वास, सरसता, उत्साह, उमंग, ऊर्जा और रचनात्मकता के मोहक सितारे टंके होते हैं तो वहीं नैराश्य, क्रोध, नीरसता, अनुत्साह, आलस्य-प्रमाद, घमंड और नकारात्मकता की धूमिल धूसर छाया […]

कविता

दरिया

जाने वो पल मुझे क्यूँ भा रहा था सड़क के किनारे लगे बिकने को मिट्टी का घड़ा किसी की याद दिला रहा था मैं इस पार वो उस पार से मुझे निहार रहा था इशारों में वो मुझे बार-बार पुकार रहा था हवस के आगे मिट गये प्रेम के किस्से मिट्टी का घड़ा लेकर अब दरिया […]

कहानी

पवित्र रिश्ता

ट्रेन को भी आज ही लेट होना था। स्टेशन की भीड़ देखकर उसका मन और भी उचाट हो कर रहा था।वह जल्दी से जल्दी इस शहर से दूर हो जाना चाहती थीं।भारी भीड़ में भी वह खुद को बहुत अकेला महसूस कर रही थी। उसका सिर दर्द से फटा जा रहा था।चारों ओर उसे लोग […]

कहानी

फेसबुक

फेसबुक चलाने में मुझें इतना मजा नहीं आता था। पर रोज फेसबुक पर कोई ना कोई रिक्वेस्ट आ जाती थी।मुझें बड़ा अजीब लगता था,अनजान लोगों से जुड़ना।कभी-कभी मन में आता था कि डिलीट कर दूँ फेसबुक को।पर आजकल फेसबुक पर एक्टिवेट ना होना भी—-। सहकर्मी पूछ ही लेते थे,सर आप भी फेसबुक पर हो क्या? […]

इतिहास कविता

कुछ कोशिश अब भी बाकी है

“कुछ कोशिश अब भी बाकी है” कुछ घाव पुराने बाकी हैं, कुछ जख्म पुराने बाकी हैं। हासिल करना है मंजिल को, कुछ कोशिश अब भी बाकी है। कुछ घाव पुराने बाकी हैं……. जीवन भर साथ निभाने में साथ तेरा गर पाया होता। तब धन्य समझती खुद को में, अब धन्य समझना बाकी है। कुछ घाव […]

आत्मकथा आत्मकथाएं कथा साहित्य बोधकथा भाषा-साहित्य लघुकथा संस्मरण

शिक्षक से जुड़ा होता है, विद्यार्थी का बचपन का कोना |

शिक्षक से जुड़ा होता है, विद्यार्थी का बचपन का कोना | सपना का लड़का अयांश अब एक साल का हो गया था| उसके जन्मदिन का न्योता हमे भी मिला था| मैं और मेरी बेहन साक्षी हम दोनों अयांश के लिए कुछ तोहफा लेने दुकान गए थे| अब एक साल के बच्चे के लिए खिलौनें से […]

इतिहास

माता पिता के दायित्व

लेख ————————— आज के इस व्यस्त वातावरण और तकनीकी युग में माता पिता के लिए भी अपने दायित्वों का निर्वहन कठिन होता जा रहा है। बढ़ती महँगाई ने जीवकोपार्जन के लिए बहुत सारे माता पिता काम पर जाते हैं ,ऐसे में दुश्वारियां और बढ़ती जा रही हैं। फिर भी हर माता पिता अपने दायित्वों की […]

इतिहास

मोबाइल

मोबाइल ◆◆◆◆ मोबाइल जीवन का अभिन्न अंग बन गया है, ऐसे लगता है इसके बिना जीवन में रखा ही क्या है? मोबाइल जन की जरूरत है, इसके बिना जीने की अब न कोई सूरत है। मोबाइल हमारी दिनचर्या का हिस्सा हो गया है, इसके बिना अब जीवन मात्र किस्सा भर हो गया है। ये सच […]