नवीनतम लेख/रचना


  • परिधान

    परिधान

    रूपा रानी व दोनों बेटियों में मतभेद था लेकर परिधान, मान्यता थी उसकी, साड़ी है भारतीय संस्कृति की पहचान। लगती सुंदर भारतीय नारियां सदैव साड़ी ही पहनकर, फबता नहीं है अन्य परिधान नारियों के सुंदर तन...

  • संयोग पर संयोग-4

    संयोग पर संयोग-4

    गुरमैल भाई से मुलाकात संयोग तो जिंदगी में होते ही रहते हैं. संयोग पर संयोग-2 की कड़ी में हमने आपको बताया था, कि हमारा नेट पर आना भी एक संयोग है. अब ब्लॉग लिखेंगे, तो पाठक-कामेंटेटर्स...

  • चाक

    चाक

    ”यह चित्र तो देखो, लगता है अभी बोल पड़ेगा!” कुम्हार के चलते चाक पर प्यार से गीली मिट्टी पर थपकी देते हुए हाथों वाले चित्र को देखते हुए निर्णायक मंडल के एक सदस्य ने कहा. ”बात...


  • बलि

    बलि

      मां का लाडला इंजीनियरिंग कर अच्छी जगह लग गया बड़े शहर में । उसके लिए बड़े बड़े शहर की लड़कियों के रिश्ते आने लगे ।गरीब खेतिहर मां बाप जिन्होंने बेटे को कैसे इस लायक बनाया...

  • मंदिर भव्य बनाएंगे

    मंदिर भव्य बनाएंगे

    श्री राम अवध पुर आएंगे हम मंदिर भव्य बनाएंगे।। चलो अयोध्या सब मिल आएं, राम नाम का मंत्र जगाएं। बहुत हो चुकी राजनीति , बहुत हो चुकी मनमानी ।। नहीं सहेंगे और अधिक हम मंदिर भव्य...

  • दोस्त

    दोस्त

      मेरे लब की मुस्कुराहट पर वो मेरे आँशु पहचान लेता है। दबे है मन मे जो अल्फाज,उनकी आवाज वो जान लेता है।। मुझे कभी मालूम ना था जिस्म पर कितने खंजर लगे है मेरे। बस...

  • गर हो आज तुम्हारी इजाज़त मुझे तो

    गर हो आज तुम्हारी इजाज़त मुझे तो

    गर हो आज तुम्हारी इजाज़त मुझे तो आसमाँ पे तुम्हारी इबारत लिखना चाहता हूँ तमाम दौलतें एक तरफ और तुम्हारी एक मुस्कान मैं तुम्हारी मुस्कान पर भरे बाज़ार बिकना चाहता हूँ रात की चादर हटे और...

  • सगाई – भाग 1

    सगाई – भाग 1

    “नहीं… पापा,नहीं.. यह संभव नहीं है! नहीं तोड़ सकती मैं यह सगाई। आपने कैसे सोच लिया कि मैं इंद्रजीत से सगाई तोड़ कर कहीं और शादी कर लूं!”… कहते कहते अदिति का गला रूंध गया तथा...

कविता