नवीनतम लेख/रचना

  • मेरे हमराही

    मेरे हमराही

    न मैं जानता हूं, न मैं पहचानता हूं। फिर भी हर दिन,हर पल उसको ही सोचता हूं। आज नहीं तो कल कल नहीं तो आज पर वे मुझे मिलेगे। मेरे हमसफर की तरह मेरे हमराही की...


  • चूम लो लक्ष्य को

    चूम लो लक्ष्य को

    केवल लक्ष्य ध्यान में तीर निशाने पर होगा तेल में देख आँख मत्स्य की अर्जुन सम धनुर्धर होगा लक्ष्य ऊँचा जितना हो निशाना दूर उतना होगा भेद कर चक्रव्यूह को अभिमन्यु सा वीर होगा पकड़ कर...

  • ग्रीष्मकालीन कवि गोष्ठी सम्पन्न

    ग्रीष्मकालीन कवि गोष्ठी सम्पन्न

    स्थानीय भगवती परिसर मालवा होजयारी मंे गर्दभ राग संस्था द्वारा हास्य कवि गोष्ठी सम्पन्न हुई। आमंत्रित कविगण सर्वश्री इसरार मोहम्मद खान, नरेश सोनी पत्रकार, सुरेन्द्र सर्किट, सौरभ चातक, मामा रामचन्द्र रघुवंशी, प्रमोद तोमर, नरेन्द्र शर्मा, सुधीर...

  • जीवन

    जीवन

    *जीवन के इस अध्याय में,* अल्पविराम सी बाधाएँ कई, मत सपनो को तू विराम दे, कैसे भी उनको पूरा करना है, करता चल नित प्रयत्न यूँ ही। *जीवन के इस अध्याय मे,* प्रताड़ित करते शब्दो की...

  • सावधान रहिए

    सावधान रहिए

    अर्पिता और अमित के जीवन में सब कुछ बड़ा ही खुशहाल चल रहा था। शादी के 20 वर्ष बाद अपने काम से अमित बहुत खुश था और अपनी बिटिया अंकिता के लिए एक सुंदर भविष्य की...

  • आधुनिक भीष्म

    आधुनिक भीष्म

    आज न जाने क्यों पौराणिक देवव्रत की कथा याद आ गई! ये देवव्रत ही तो दृढ़ प्रतिज्ञा से देवव्रत भीष्म बने थे. एक देवव्रत और भी थे, जिनसे मेरी मुलाकात आज से लगभग पैंसठ साल पहले...

  • गज़ल

    गज़ल

    किस्मत से न था कोई गिला सालों पहले इश्क न जाने क्यों मुझे हुआ सालों पहले ========================== मुसलसल चोटों ने पत्थर सा बन गया हूँ मैं दर्द मुझको हुआ करता था सालों पहले ========================== मैं मर...



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