नवीनतम लेख/रचना

  • मोहन कूँ देखन कूँ

    मोहन कूँ देखन कूँ

    मोहन कूँ देखन कूँ, तरसि जातु मनुआँ; देखन जसुमति न देत, गोद रखति गहिया ! दूर रखन कबहुँ चहति, प्रीति करति खुदिइ रहत; डरति रहति उरहि रखति, गावत कछु रहिया ! थकति कबहुँ रुसति कबहुँ, नाचत...

  • किलकावत काल पुरुष !

    किलकावत काल पुरुष !

    किलकावत काल पुरुष, धरती पै लावत; रोवन फिरि क्यों लागत, जीव भाव पावत ! संचर चलि जब धावत, ब्राह्मी मन होवत; महत अहम चित्त भ्रमत, पंच भूत होवत ! प्रतिसंचर प्राण पात, वनस्पति जन्तु होत; मनुज...




  • “ॐ जय बाबा बद्री विशाल की”

    “ॐ जय बाबा बद्री विशाल की”

    “दोहे” गंगोत्री यमुनोत्री, बद्रीनाथ केदार चारोधाम विराजते, महिमा शिव साकार॥-1 माँ पार्वती ने दिया, अपना घर उपहार इस बैकुंठ विराजिए, ममता विष्णु दुलार॥-2 स्वर्गलोक की छावनी, देव भूमि यह धाम ब्रम्हा विष्णु महेश को, बारंबार प्रणाम॥-3...

  • हो गया

    हो गया

    गजल ☞☜☞☜ यार हमसे बिछड़ अधमरा हो गया हम न जाने कि क्यों अनमना हो गया अब खता कोन सी हो गयी है तभी दिन बहुत से यही सिलसिला हो गया चाह जो आपसे हो गयी...



  • छोटी सी खुशी

    छोटी सी खुशी

    “आप अपनी माँ को समझाते क्यों नहीं ,बुढा़पे में भी मियां बीवी प्रेमी युगल की तरह घूमने का कार्यक्रम बना रहें है क्या ये सब…” सीमा राजीव के माता पिता पर बेकार के आक्षेप लगा रही...

कविता