नवीनतम लेख/रचना


  • नमकीन पसीना

    नमकीन पसीना

    चले मेला आओ भालू भाई पहनो सूट, बूट और टाई देखो बाहर शीत लहर है ठण्डी हवा चारो पहर है आप हो मेले के महाराजा खेल होगा और बजेगा बाजा आओ आओ जल्दी आओ मेहनत के...

  • जद्दोजहद

    जद्दोजहद

    “क्यों पापा कब तक यूँ ही असमंजस की स्थिति में हमें रखेंगे? माना कि आप मुखिया हैं इस घर के ।परंतु आप यह क्यों नहीं मानते कि माँ के बिना इस घर की कल्पना भी अवश्यंभावी...

  • गुरु अगर न होते

    गुरु अगर न होते

    गुरु अगर न होते तो जग में राहें चुनना मुश्किल था गुरु न होते तो अर्जुन का अर्जुन बनना मुश्किल था गुरु के जैसा शुभचिंतक और न कोई दूजा है गुरवर के पावन चरणों को ईश्वर...



  • कहानी- समर्पण

    कहानी- समर्पण

    सुबह -सुबह चाय की चुस्कियों के बीच राहुल ने पत्नी सोना से अचानक पूछा – “क्या तुमने कभी किसी से प्यार किया है?“ यकायक ऐसा अटपटा प्रश्न सुन कर सोना घबरा सी गई कि कहीं उसके मुँह...




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