नवीनतम लेख/रचना

  • युग पुरुष

    युग पुरुष

    जीवन तो छोटा सा है इसकी क्या चिंता करना। समर्पित कर मातृभूमि को कफन ओढ़ निकल पड़ना। मत सोचो जीवन पथ पर सुकोमल पुष्प मार्ग मिलेगा। साथी बना कंटक को अपना कभी न कंटक पग लगेगा।...



  • गज़ल

    गज़ल

    जानता हूँ कि न आएगा पलट कर तू मैं एक मील का पत्थर हूँ और मुसाफिर तू मुझे यकीन है तुझको भी इश्क है मुझसे ये और बात है करता नहीं है जाहिर तू तुझसे मिल...

  • करिश्माई कैच

    करिश्माई कैच

    क्रिकेट मैच की शौकीन नीलिमा टी.वी. देख रही थी. दुबई में एशिया कप-2018 के एक मुकाबले में भारत और पाकिस्तान क्रिकेट मैच चल रहा था. मनीष पांडे ने पाकिस्तानी कप्तान का करिश्माई कैच लपका और इस...

  • कुंडलिया

    कुंडलिया

    “कुंडलिया” कितना कर्म महान है, व्यर्थ न होती नाल सरपट घोड़ा दौड़ता, पाँव रहे खुशहाल पाँव रहे खुशहाल, सवारी सुख से दौड़े मेहनती मजदूर, स्वस्थ रहता जस घोड़े कह गौतम कविराय, कर्म फलता है इतना जितना...


  • अकर्मण्यता

    अकर्मण्यता

    ये तुम्हारी जड़ता तुम्हारी अकर्मण्यता एक दिन उत्तरदायी होंगी तुम्हारे ह्रास का और कठघरे में खड़ी होंगी और जवाब देंगी सृष्टि के विनाश का परिस्थतियाँ खुद नहीं बदल जाती हैं या सम्भावनाएँ यूँ ही नहीं विकसित...

  • कविता – बेटी की अहमियत

    कविता – बेटी की अहमियत

    धन की लालसा मन में जगाते हो, बेटी को पराया धन बोल गर्भ में गिराते हो। कहते है ,के बेटा वंश बढायेगा, यदि बहू न आई आंगन तो किलकारी कौन गूंजायेगा। हे मानुष यह जघन्य अपराध ही मनुष्य...


कविता