नवीनतम लेख/रचना

  • कोई सिखे तो…तुमसे।

    कोई सिखे तो…तुमसे।

    किसी की उदासियों में भी खुशियां बिखेरना हंसना हंसाना कोई सिखे तो…तुमसे। अधूरे लफ्जों और बिन बात की बातों से भी सब कुछ कह देना कोई सीखे तो… तुमसे। खुद से अपरिचितों को खुद से ही...

  • कहानी भी ख़तम होगी।

    कहानी भी ख़तम होगी।

    कहानी जो, शुरू थी वो, कहानी भी, ख़तम होगी। निशानी का, करोगे क्या, निशानी भी, ख़तम होगी।। नही कुछ भी बचा रहता ज़माने का यही सच है, नई को क्या कहोगे तुम पुरानी भी ख़तम होगी।...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    होनी थी जितनी बारिश-ए-इकराम हो चुकी अब आओ घर को लौट चलें शाम हो चुकी किस्सा-ए-गम अपना उनको जब लगा कहने बोले वो ये खबर तो कब की आम हो चुकी पहने हुए थी शर्म का...



  • कहानी – सिमरन

    कहानी – सिमरन

    अस्पताल के बेड पर पडे हुए शेखर को देखकर सिमरन सिहर जाती हैं। कभी सोचा नहीं था कि उसे इस हाल में देखेगी। कलेजा फटने को हो गया जी हुआ चिल्ला कर रो पडे। पैर कांपने लगे...





कविता