नवीनतम लेख/रचना

  • गीत – बेटी

    गीत – बेटी

    बाबुल के आँगन की बेटी , न हुई कभी परायी है जुदा होने की जो सोच लूँ , दिल दे तभी दुहाई है ….. छोटी गुड़िया है यह बेटी , यह कितनी भोली है सुन अँगना...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    सफर यूँ ही अपना ये चलता रहे चेहरा खुशियों से तेरा ये खिलता रहे साथ देना हमेशा ही तुम यूँ मेरा चाहे जितनी भी झंझावात होती रहे एक पल भी जुदा जो तू मुझसे रहे सांसे...

  • गज़ल

    गज़ल

    कोई मतला, कोई मक्ता नहीं लिक्खा मैंने हुई मुद्दत नाम तेरा नहीं लिक्खा मैंने ========================== चाहता तो तुझे बदनाम भी कर सकता था पर कातिल तुझे अपना नहीं लिक्खा मैंने ========================== बहा के अश्क बेशुमार कोरे...

  • पानी नहीं है

    पानी नहीं है

    प्यासा गला रूठा बर्तन खाली पानी नहीं है तमन्ना जगी है पी लूँ दो घूँट पर उदासीनता सामने हाथ पसारती मुँह बनाती खड़ी है जैसे लिए लोटा पहले से। क्या करूँ? क्या सोचूँ? किसे बोलूँ? यहाँ...

  • व्यंग्य- चेला चंटाल

    व्यंग्य- चेला चंटाल

    अक्सर गुरु घंटाल की चर्चा होती है. मैंने विचार किया कि अगर गुरु घंटाल हो सकता है तो चेला चंटाल क्यों नहीं. लखनऊ के सनकी जी ने लिखा है- गुरु-गोविंद दोऊ खड़े काके लागौं पाँय बलिहारी...


  • सत्य की जय हो

    सत्य की जय हो

    “सत्य की जय हो” विनम्रता से सुख को भोगा जा सकता है। धैर्य से दुख को मात दिया जा सकता है। अध्ययन करके विद्या अर्जित की जा सकती है। सम्मान देकर सम्मान पाया जा सकता है।...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    फिर वे अपनी दुकानें सजाने लगे हैं और भीड़ लोगों की बढ़ाने लगे हैं जिसे हाथ पकड़कर चलना सिखाया वे ही हमको अब आँखें दिखाने लगे हैं यह जानकर कि वो अपराधी हैं फिर भी लालच...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    जो अम्लो-अमन की दुआ करते हैं वे लोग अपना हक अदा करते हैं सियासत वाले होते हैं वाचाल नाम के वास्ते जलसा करते हैं देते सौगात में भरकर लिफाफे उनका ही आज वे भला करते हैं...


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