प्रजातंत्र का तंत्र
भारत के गणतंत्र की, ये कैसी है शान।भूखे को रोटी नहीं, बेघर को पहचान॥ सब धर्मों के मान की, बात
Read Moreभारत के गणतंत्र की, ये कैसी है शान।भूखे को रोटी नहीं, बेघर को पहचान॥ सब धर्मों के मान की, बात
Read Moreबात एक ही यूँ सदा, कहता है गणतंत्र।बने रहे वो मूल्य सब, जन- मन हो स्वतंत्र। संसद में मचता गदर,
Read Moreरोटी के ही वास्ते होरी छोड़ें गांवतब भी अभाव में धंसे उसके अपने पांव कैसा रमेश शहर है पूछे ना
Read Moreजाने कितनी पीठ बन गयी, कितने मठ उपजाये,हर मठ में शंकराचार्य, बड़े जतन बन कर धाये।लोभ मोह अहंकार, गाड़ी घोड़ा
Read Moreआते हैं वो रात में, जेसीबी के साथ |पूरा जंगल काटते,दिखे सैंकड़ो हाथ || तेज गति से रात में, मचा
Read Moreबाजरे की रोटी, चूल्हे पर बनी हो,मट्ठे के कटोरे संग, घी में सनी हो।गर्म गर्म खाइये, रसोई में बैठकर,बीमारियाँ दूर,
Read Moreदुखमय है ये जिंदगी ,उसमे सुख तू खोज ,जीवन के इस सफर में ,नई परीक्षा रोज। सुख दुख संकट आपदा
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