दुर्गेश के दोहे
बसंत आएगा फिर से वही, खुशियों भरा बसंत। महकेगा सारा चमन, भरमाएगा कंत। जग गाएगा गीत पीर लिए फिरते सभी,
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Read Moreसूर्य उत्तरायण हुए, अर्पित नमन प्रणाम। प्राण प्रतिष्ठित अवध में, सूर्यवंश के राम। ऋषिवत छवि थी राम की, निश्छल आर्ष
Read Moreखुशियों का संसार है,आज सकल साकेत। सारी दुनिया हर्षमय,जोश हुआ समवेत।। स्वागत,वंदन,मान है,नाच रहा उल्लास। आज अयोध्या झूमती,हुआ राम-आवास।। राम
Read Moreराम मन्दिर बन गया तो जल गये, धर्मनिरपेक्षता पर चाल चल गये। कहते हैं जाओ मस्जिद बच्चों संग, हिन्दुत्व की
Read Moreत्रेता युग सा लग रहा, अब सारा संसार , वैतरणी है ‘रामलला,’वही करेंगे पार।। मंदिर की स्थापना ,पूजन में है
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