ऋषभ छंद
गुरु शिक्षा का दे वरदान, हमें बनाते ज्ञानी। सहज सरल समझाते भेद, अनुशासित अभिमानी।। चुनना नित शूलों से फूल, हुनर
Read Moreप्रकृति का यह मोहक रूप,लगता है सबसे अनूप,पल-पल रंग बदलती काया,कभी छांव है,कभी है धूप,कल-कल करती नदियों की धार,बहती जाती
Read Moreविधा- कविताशीर्षक- श्री कृष्ण हमारे सारथी और गुरु हमारे जीवन रथ के सारथी श्री कृष्ण और गुरु,जीवन की रणभूमि में
Read Moreबच्चे मन के सच्चे,निर्मल इनके भाव,हँसी बाँटते जग में,मिटा देते हर घाव।न छल-कपट की भाषा,न मन में कोई भार,इनकी मासूमियत
Read Moreशरारत में भी छिपा बचपन का उजला संसार,मार से नहीं सुधरता कोई नन्हा दिलदार।थोड़ा-सा डाँटें,फिर समझाएँ प्यार से,गलती को सीख
Read Moreशिक्षक जीवन के मंत्र हैं,शिक्षक जीवन के तंत्र हैं,अज्ञान के अँधियारे मेंज्ञान का पहला दीपक हैं। शिक्षक केवल पाठ नहीं
Read Moreविधा- कविताशीर्षक- मेरे कृष्ण, मेरी दृष्टि में मेरे कृष्ण केवल मंदिरों में विराजमान,एक आराध्य नहीं, मेरे जीवन की दृष्टि हैं,मेरे
Read Moreबसो मेरे नयनों में तुम श्याम विधा- कविताशीर्षक- बसो मेरे नयनों में तुम श्याम मेरे मुरलीधर घनश्याम,बसो मेरे नयनों में
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