ग़ज़ल
गुनहगार के साथ लाखों खड़े हैंसताए हुए लोग तन्हा पड़े हैं उजालों की तारीफ़ होती नहीं हैमगर उन अँधेरों के
Read Moreभादो की तिथि अष्टमी, प्रकट हुए गोपाल।जन मन हर्षित देखकर, गोद नंद के लाल।। मोहन तू ही आत्मधन,प्रभु तू ही
Read Moreहे गोबिन्द हे गोपालहे गोबिन्द हे गोपालअनादि अनंत अति विशाल,इस जगत के कर्ण धार,प्रभु सुन लो भक्त की पुकारह्रदय से
Read Moreगोपाला बनकर सब बच्चे,देखत मटकी को ललचाय lआओ रे आओ सब साथी,मटकी इज्जत बन गइ हाय ll याद करो जसुमति
Read Moreसम्पूर्ण ब्रज में छा रहा मंगल अपारआया रे आया जन्माष्टमी त्यौहार। देवकीनंदन श्री वसुदेव दुलारेजन्म से ही रहे उनके करतब
Read Moreमेरा प्यार हिमालय जैसा, तेरा प्यार झील का पानीमेरा प्यार आकाश को छूता, तेरा प्यार जल की रानीमेरा प्यार खिलते
Read Moreनूर तिमिर को जो करें, बाँटें सच्चा ज्ञान।माटी को जीवंत करें, गुरुवर हैं भगवान।। भरें प्रतिभा, योग्यता, बुनें सभ्य समाज।समदृष्टि,
Read Moreमैं एक अनुभवहीन कवि हूँमेरे अनुभवगहराईयों तक नहीं होतेकिसी विषय परसरल शब्दों की माला पहना देता हूँकुछ शब्द बाहर से
Read Moreघर देवकी-वसुदेव के, कृष्ण लिए अवतार।मात यशोदा ने किया, पालन-पोषण प्यार॥ तारे सबकी आँख के, गोकुल के हैं लाल।माखन-मिश्री संग
Read Moreतिरछी नज़र तेरी, बिना देखे कमाल कर गई,उठे बिना ही बवाल पर बवाल कर गई।लबों पे थिरकती मुस्कान, सवालों पे
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