पद्य साहित्य

कविता

चलो हकीकत को दोहराएं

चलो हकीकत कोफिर दोहराओ मित्रों,बिरसा, अम्बेडकर, कलाम कोफिर से लाओ मित्रों,अजीब सी तकलीफ होती हैकाल्पनिक आकारों के पीछेआंख मूंद भागते

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