हिंदी
मां के आंचल सी पावन हिंदीआंगन में तुलसी सी महके हिंदी। गंगा की निर्मल धारा सी बहती हिंदीदादी मां की
Read Moreछिद्र ढूँढ़ता ही रहा, सबके सदा समाज।ग्रीवा में निज झाँकने, में लगती है लाज।। औरों पर ही थोपना, आता गलती
Read Moreबीते हुए दिनों की यादेंमाटी के चूल्हे की बात। भुला नहीं पाए हम अब भीगर्म -गर्म रोटी का स्वादकढ़ी खरी
Read Moreसागर की धरती रो पड़ी, आँखों में है नमी,किसने घोला ज़हर, बाँटी हैं मौत की ग़मी?जाम समझ बढ़े, “जिंदगी” हाथ
Read Moreजो कल तक था अडिग पहाड़,वो आज बोझ बन गया,बदले वक्त के इस दौर में,बाबा आदम की खोज बन गया,जिस
Read Moreदादू से जब मिल गया, नन्हा-सा प्रज्ञान।बाहों में भर प्यार से, खिल उठा अरमान।। दादू बोले आ गया, मेरा प्यारा
Read Moreसंत नहीं, वे संदेश बने,जन-जन के विश्वास बने,अपने उजले कर्मों से वे,युग-युग तक प्रकाश बने। फिरोज़ाबाद की पावन धरती,लक्ष्मण नारायण
Read Moreजो रोज़ स्वयं को परखता,वही निखरता जाता है,अपनी हर कमी को समझकर, सुधारता जाता है।दर्पण में खुद का चेहरा नहीं,चरित्र
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