सिस्टम का बोझ और बुजुर्ग की पीठ
ज़नाब जूते न गंदे हो जाएं युवा साहब के,देखों इंसानियत को कीचड़ में बहा दिया।इस उम्र में उन्हें लाठी का
Read Moreज़नाब जूते न गंदे हो जाएं युवा साहब के,देखों इंसानियत को कीचड़ में बहा दिया।इस उम्र में उन्हें लाठी का
Read Moreहिंदी मेरी अभिव्यक्ति, हिंदी मेरी पहचान,इसमें है विराजित, मधुर “आनंद” गान,हिंदी भाषाओं में प्यारी, हिंदी में बसे हैं प्राण,शब्दों की
Read Moreसफेद बालों को देखकरअपनी पत्नी से कह दिया किअब तो तुम बूढ़ी हो रही हो,अपने आज में खो रही हो,उसने
Read Moreसाधारण सी कविताभी चोंच मारती हैआपकी गलतियों परकीचड़ उछालती हैभले छोटी हैपर आपकी औकात कोनापती हैझूठी बातों परताला लगा देती
Read Moreवक्त ख़ुद तो कभी दिखाई नहीं देता,मगर हाँ,वक्त सब कुछ दिखा देता।कौन अपना है,कौन पराया,ये समझा देता,चेहरों के पीछे छिपा
Read Moreशिव का सावन माह मनोहर।हर जन-मन को लगता सुंदर।।शिव जी के मन को ये भाए।प्रकृति संग ये खूब सुहाए।। सावन
Read Moreकितना करते हैं हम-आप जितना कहते फिरते हैं,ईमानदारी से सोचिए कितना विचार करते हैं?मगर आप क्यों करेंगे?आपकी आँखों का पानी जो मर
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