पढ़ा लिखा मजदूर हुआ
करना था व्यापार मगर मैं जॉब में आकर अटक गया,ज्यादा धन के लालच में, मै लक्ष्य से अपने भटक गया।प्यार
Read Moreकरना था व्यापार मगर मैं जॉब में आकर अटक गया,ज्यादा धन के लालच में, मै लक्ष्य से अपने भटक गया।प्यार
Read Moreथम थम कर क्यों बज रही, पायल तेरी बोल।झुमकी धरती पर मिली,राज जरा तू खोल।। छेड़ नहीं मुझको प्रिये,जाने तू
Read Moreसाइकिल तथा काररास्ते से जा रहे थेअपनी सौंदर्य तथातेज रफ्तार परकार को अभिमान थाकार साइकिल से बोली,तुम्हारी औकात छोटी हैएक
Read Moreसोचो समझो फिर करो, अपना आज सुधार। क्योंकि मिलता है नहीं, ये तो कहीं उधार।। ये तो कहीं उधार, हृदय
Read Moreकल दोपहर मैं अपनी आड़ी-तिरछी रचनाओं में उलझा हुआ था,कि मित्र यमराज कबाब में हड्डी सरीखे आ गएस्वागत सत्कार जलपान की परंपरा
Read Moreज़नाब जूते न गंदे हो जाएं युवा साहब के,देखों इंसानियत को कीचड़ में बहा दिया।इस उम्र में उन्हें लाठी का
Read Moreहिंदी मेरी अभिव्यक्ति, हिंदी मेरी पहचान,इसमें है विराजित, मधुर “आनंद” गान,हिंदी भाषाओं में प्यारी, हिंदी में बसे हैं प्राण,शब्दों की
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