नई भोर का गीत
पतझड़ चाहे छीन ले, पत्तों का संसार।फिर हर डाली पर खिले, नवजीवन के हार॥ सूनी राहें देखकर, मन मत करो
Read Moreपतझड़ चाहे छीन ले, पत्तों का संसार।फिर हर डाली पर खिले, नवजीवन के हार॥ सूनी राहें देखकर, मन मत करो
Read Moreमेरे अक्षरों में भारत है, मेरी वाणी में स्वाभिमान,मेरी बोली के कण-कण में, गूँजे मेरा हिंदुस्तान।माँ के आँचल की ममता
Read Moreऐ मेरे मन,पापों और गुनाहों से अब तौबा कर लो,अंतर की मैली गलियों को पश्चाताप से धो लो।आज सँभल जाओ,कल
Read More1.नीरजा में जो विरह राग लिखा, हे महादेवी तुमको प्रणाम |यामा में जो पीड़ा का साज लिखा, हे महादेवी तुमको
Read Moreमैंने डाक्टर साहब से पूछा,मजबूर आदमीजब अस्पताल आता हैउसके हालातों को देखकर भीइतना लम्बा-चौड़ाबिल बना दिया जाता हैकुछ रहम कीजियेउससे
Read Moreअस्सी के बस चित्र से, खुश होते हो आज।सोचो उस तस्वीर में, कैसा बसा समाज॥ रिश्ते अपनापन लिए, दिल में
Read Moreअस्सी का वह दौर था, रिश्तों में था प्यार।अब रिश्ते है फोन में, सूना है घर-द्वार॥ थोड़ा था पर बाँटकर,
Read Moreचमचे कहते फिर रहे, पप्पू बहुत कमालजहां पड़ें पग आपके, होता वहीं धमालहोता वहीं धमाल, चाल उसकी है ऐसीबड़े बड़ों
Read Moreउगता सूरज कह रहा, गहन निशा के बाद ।आती है सुख भोर की, रखना बस यह याद ।। — साधना
Read Moreजर्जर इमारतें गिरती रहीं, तंत्र सोता रहा,दीवारों की दरारें खूब चीखती रहीं,हमेशा शहर खामोश होता रहा।किसी छत ने पहले ही
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