पद्य साहित्य

मुक्तक/दोहा

महीयसी महादेवी जी के परिनिर्वाण दिवस पर चार मौलिक मुक्तक

1.नीरजा में जो विरह राग लिखा, हे महादेवी तुमको प्रणाम |यामा में जो पीड़ा का साज लिखा, हे महादेवी तुमको

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कविता

डाक्टर साहब रहम कीजिये

मैंने डाक्टर साहब से पूछा,मजबूर आदमीजब अस्पताल आता हैउसके हालातों को देखकर भीइतना लम्बा-चौड़ाबिल बना दिया जाता हैकुछ रहम कीजियेउससे

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