बच्चे मन के सच्चे
बच्चे मन के सच्चे,निर्मल इनके भाव,हँसी बाँटते जग में,मिटा देते हर घाव।न छल-कपट की भाषा,न मन में कोई भार,इनकी मासूमियत
Read Moreबच्चे मन के सच्चे,निर्मल इनके भाव,हँसी बाँटते जग में,मिटा देते हर घाव।न छल-कपट की भाषा,न मन में कोई भार,इनकी मासूमियत
Read Moreशरारत में भी छिपा बचपन का उजला संसार,मार से नहीं सुधरता कोई नन्हा दिलदार।थोड़ा-सा डाँटें,फिर समझाएँ प्यार से,गलती को सीख
Read Moreशिक्षक जीवन के मंत्र हैं,शिक्षक जीवन के तंत्र हैं,अज्ञान के अँधियारे मेंज्ञान का पहला दीपक हैं। शिक्षक केवल पाठ नहीं
Read Moreविधा- कविताशीर्षक- मेरे कृष्ण, मेरी दृष्टि में मेरे कृष्ण केवल मंदिरों में विराजमान,एक आराध्य नहीं, मेरे जीवन की दृष्टि हैं,मेरे
Read Moreबसो मेरे नयनों में तुम श्याम विधा- कविताशीर्षक- बसो मेरे नयनों में तुम श्याम मेरे मुरलीधर घनश्याम,बसो मेरे नयनों में
Read Moreभादो की तिथि अष्टमी, प्रकट हुए गोपाल।जन मन हर्षित देखकर, गोद नंद के लाल।। मोहन तू ही आत्मधन,प्रभु तू ही
Read Moreगोपाला बनकर सब बच्चे,देखत मटकी को ललचाय lआओ रे आओ सब साथी,मटकी इज्जत बन गइ हाय ll याद करो जसुमति
Read Moreमैं एक अनुभवहीन कवि हूँमेरे अनुभवगहराईयों तक नहीं होतेकिसी विषय परसरल शब्दों की माला पहना देता हूँकुछ शब्द बाहर से
Read Moreतिरछी नज़र तेरी, बिना देखे कमाल कर गई,उठे बिना ही बवाल पर बवाल कर गई।लबों पे थिरकती मुस्कान, सवालों पे
Read Moreजब दर्द सीने में इकट्ठा हो जाता हैतो उसे बहाने के लिए कुछ लिख लेती हूंजब प्यार हद से अधिक
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