हिन्दुस्तान के कोने कोने का सुमधुर संवाद है।
धड़कनों में गूंजती है ज़बान हमारी शान है,हिंदी अपनी मातृभाषा, देश की पहचान है। सरहदों को चीरती जो भाव का
Read Moreधड़कनों में गूंजती है ज़बान हमारी शान है,हिंदी अपनी मातृभाषा, देश की पहचान है। सरहदों को चीरती जो भाव का
Read Moreनदियाँ अपना रौद्र रूप धरती हैं,तो सिर्फ़ घर नहीं बहते-बह जाते हैं सपने भी,किसी माँ की उम्मीद,किसी पिता की प्रतीक्षा,बच्चों
Read Moreचलो हकीकत कोफिर दोहराओ मित्रों,बिरसा, अम्बेडकर, कलाम कोफिर से लाओ मित्रों,अजीब सी तकलीफ होती हैकाल्पनिक आकारों के पीछेआंख मूंद भागते
Read Moreमैं रंग-बिरंगी पुष्पों की फुलवारी हूँमैं वसुधा को बनाती सुंदर प्यारी हूँ। मैं नीत–नीत नूतन बहार लाती हूँमैं प्रकृति को
Read Moreमैं ऐसी कवितानहीं लिखना चाहता हूँजिसमें झूठी प्रशंसा होजिसमें अहंकार होबदले की भावना सेउबाल मार रहा होअसंवेदना की धारा बहती
Read Moreवो गाँव की मिट्टी,वो गाँव का आँगन,वो बचपन के सुहाने दिन,वो अपनों का दुलार और अपनापन।कुएँ से पानी खींचना,आम के
Read Moreअंधेरे को चीर निकली, रोशनी की एक नई किरण,आसमान की ऊँचाइयों पे, लिखीं एक नई दास्तान।श्रीहरिकोटा की धरती से, जब
Read Moreप्रकृति का यह मोहक रूप,लगता है सबसे अनूप,पल-पल रंग बदलती काया,कभी छांव है,कभी है धूप,कल-कल करती नदियों की धार,बहती जाती
Read Moreविधा- कविताशीर्षक- श्री कृष्ण हमारे सारथी और गुरु हमारे जीवन रथ के सारथी श्री कृष्ण और गुरु,जीवन की रणभूमि में
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