प्रश्न
अपने सारे प्रश्न उठाओ।बिल्कुल आप नहीं पछताओ।।जितना चाहो झंडे गाड़ो।क्यों आखिर तुम मौका ताड़ो।। सबके अपने प्रश्न हैं भारी।इक दिन
Read Moreशिव का सावन माह मनोहर।हर जन-मन को लगता सुंदर।।शिव जी के मन को ये भाए।प्रकृति संग ये खूब सुहाए।। सावन
Read Moreकितना करते हैं हम-आप जितना कहते फिरते हैं,ईमानदारी से सोचिए कितना विचार करते हैं?मगर आप क्यों करेंगे?आपकी आँखों का पानी जो मर
Read Moreसागर की धरती रो पड़ी, आँखों में है नमी,किसने घोला ज़हर, बाँटी हैं मौत की ग़मी?जाम समझ बढ़े, “जिंदगी” हाथ
Read Moreजो कल तक था अडिग पहाड़,वो आज बोझ बन गया,बदले वक्त के इस दौर में,बाबा आदम की खोज बन गया,जिस
Read Moreसंत नहीं, वे संदेश बने,जन-जन के विश्वास बने,अपने उजले कर्मों से वे,युग-युग तक प्रकाश बने। फिरोज़ाबाद की पावन धरती,लक्ष्मण नारायण
Read Moreजो रोज़ स्वयं को परखता,वही निखरता जाता है,अपनी हर कमी को समझकर, सुधारता जाता है।दर्पण में खुद का चेहरा नहीं,चरित्र
Read Moreधड़कनों में गूंजती है ज़बान हमारी शान है,हिंदी अपनी मातृभाषा, देश की पहचान है। सरहदों को चीरती जो भाव का
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