साइकिल तथा कार
साइकिल तथा काररास्ते से जा रहे थेअपनी सौंदर्य तथातेज रफ्तार परकार को अभिमान थाकार साइकिल से बोली,तुम्हारी औकात छोटी हैएक
Read Moreसाइकिल तथा काररास्ते से जा रहे थेअपनी सौंदर्य तथातेज रफ्तार परकार को अभिमान थाकार साइकिल से बोली,तुम्हारी औकात छोटी हैएक
Read Moreकल दोपहर मैं अपनी आड़ी-तिरछी रचनाओं में उलझा हुआ था,कि मित्र यमराज कबाब में हड्डी सरीखे आ गएस्वागत सत्कार जलपान की परंपरा
Read Moreज़नाब जूते न गंदे हो जाएं युवा साहब के,देखों इंसानियत को कीचड़ में बहा दिया।इस उम्र में उन्हें लाठी का
Read Moreहिंदी मेरी अभिव्यक्ति, हिंदी मेरी पहचान,इसमें है विराजित, मधुर “आनंद” गान,हिंदी भाषाओं में प्यारी, हिंदी में बसे हैं प्राण,शब्दों की
Read Moreसफेद बालों को देखकरअपनी पत्नी से कह दिया किअब तो तुम बूढ़ी हो रही हो,अपने आज में खो रही हो,उसने
Read Moreसाधारण सी कविताभी चोंच मारती हैआपकी गलतियों परकीचड़ उछालती हैभले छोटी हैपर आपकी औकात कोनापती हैझूठी बातों परताला लगा देती
Read Moreवक्त ख़ुद तो कभी दिखाई नहीं देता,मगर हाँ,वक्त सब कुछ दिखा देता।कौन अपना है,कौन पराया,ये समझा देता,चेहरों के पीछे छिपा
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