कविता

कविता

अभिलाषा है यह मेरी

विधा- कविताशीर्षक- अभिलाषा है यह मेरी सर्वजनहिताय-सर्वजनसुखाय कर्म हों,सत्य-अहिंसा-मधुर वचन, सुधर्म हों,हर्षित हों सबके मन, हो देश का हित,अभिलाषा है

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