माटी की महक
माटी की महक। गांव में रहते लोगों का भोलापन। लहलहाते खेत। गाय भैंस का रंभाना। बैलगाड़ी की सवारी। अमरूद, आम,
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Read Moreआज सुबह ऑफिस में कुछ अलग ही हलचल थी। चायवाले की आवाज़ धीमी, कंप्यूटर कीबोर्ड की आवाज़ें तेज़, और सभी
Read Moreआज पहली बार धीर को खुशी के साथ पूरी तरह आत्मसंतुष्टि हो रही थी। हो भी क्यों न? आखिर उसने
Read Moreचुटकी भर सिन्दूर की कल्पना मात्र से कभी- कभी किसी की विरान जिन्दगी में किस तरह खुशियों के रंग भर
Read Moreजीवन के सत्ताइस सुहावने सावन एक साथ गुजारने के बाद हमारे श्रीमान् जी चलते बने। बस! सावन भी
Read Moreहेलो, जी मैं “अलाने” शहर से विकराल रूप झंझावात बोल रहा हूँ। क्या मैं “फलाने” शहर के कुपित कुमार अग्नि
Read Moreसुबह के छह बज रहे थे। आज रात से ही बारिश हो रही थी। गांव के सरकारी माध्यमिक स्कूल में
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