कहानी – एक आभासी मित्र
“हैलो !” एक अनजान नंबर से महिला की आवाज आई।दीपक थोड़ी -सी घबराहट से जवाब देते हुए कहा,”जी…नमस्ते।”“मैं सुधा बोल
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Read Moreप्रियंका सौरभ की लघुकथाएं — प्रियंका सौरभ
Read Moreअपनी बड़ी माता महारानी कौशल्या के पास जाने से पहले भरत जी कैकेयी को फिर फटकारने लगे- ”क्रूरहृदया दुष्टा कैकेयी!
Read Moreबाबा नौकरी में थे। जब तक कमाते रहे, बेटा-बहू बड़ा अच्छा व्यवहार करते थे, पूछ-पूछकर खाना देते, हाल-चाल पूछते, सब
Read Moreश्रीराम के वनगमन की बात सुनकर भरत जी स्तब्ध रह गये। उन्होंने सोचा कि अवश्य श्री राम से जाने-अनजाने में
Read Moreदिया और रिया दोनों सगी बहनें, दोनों हमेशा पूरे घर को खुशी से गुजायान रखते , लेकिन कहा जाता है
Read Moreतेरहवीं की भीड़ अब छँट चुकी थी। जो रिश्तेदार आए थे, वे अब लौट चुके थे। दीवारों पर अब भी
Read Moreकामकाजी स्त्रियाँ सिर्फ ऑफिस से नहीं लौटतीं, बल्कि हर रोज़ एक भूमिका से दूसरी में प्रवेश करती हैं—कर्मचारी से माँ,
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