लघुकथा – धराशायी
अपार्टमेंट के लिफ्ट में चढ़ते-उतरते सविता और मोहिनी में परिचय हुआ और धीरे-धीरे बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। ग्राउंड फ्लोर
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Read More“अरे…अरे, तरबूज भाई थोडा उधर हो जाओ। ” अंगुर ने धीरे से कहा। ” अरे जा, मैं आराम से बैठा
Read Moreडॉ. अनुज शाम को अपने दोस्त जगवीर के साथ गाँव घूमने निकले थे। चलते-चलते उन्हें गाँव के पश्चिमी छोर पर,
Read More“वह धूप का टुकड़ा था या नारी की बेचारी अस्मत का साक्षी!” न धूप का टुकड़ा समझ पा रहा था
Read Moreशादी के दिन रेखा को उसके मायके से एक बड़ी सी ट्रॉली मिली — बर्तन, गहने, कपड़े। सास ने कहा — “अच्छा है, कुछ बोझ तो
Read Moreसुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक रसोई में लगी रहती थी। उसकी दुनिया वहीं थी — मसालों के डिब्बे, जलते पराठे और भीगी आँखें। एक
Read Moreरश्मि हर शाम बालकनी में बैठकर एक चिट्ठी लिखती थी — अपने पुराने प्रेमी को। शादी के बाद उसका वो हिस्सा कहीं
Read Moreकमला का आंचल कभी दूध से भीगा रहता था, कभी आँसुओं से। हर बार जब पति गुस्से में हाथ उठाते, वह चुप
Read Moreगोपाल की अर्थी उठने ही वाली थी। बाहर गये बेटे पंकज का सब इंतजार कर रहे थे। एक ने कहा-
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