फीस और चंदा
दीदी,,आपसे एक बात कहनी थी”। मीनू ने अपनी मालकिन से कहा।*हां,बोल, मालकिनसुरेखा ने कहा। मुझे थोड़े पैसे चाहिए थे,वो बेटी
Read Moreदीदी,,आपसे एक बात कहनी थी”। मीनू ने अपनी मालकिन से कहा।*हां,बोल, मालकिनसुरेखा ने कहा। मुझे थोड़े पैसे चाहिए थे,वो बेटी
Read More“वह आज भी गैर जवाबदेही में जी रहा है।” रघु ने अपने बगल गिर की बात सोमारू से बेबाक कही।
Read Moreप्रिय अमन, मेरी आँखों के तारे, नूर‑चश्म,बेटा, तुम बचपन में मेरे कंधे पर सिर रखकर ज़िद किया करते थे, कभी
Read Moreकमली बैठे-बैठे जलते तवे को घूर रही थी । शराबी पति की हाड़ तोड़ती मार खाकर रोटी बनाने का किसका
Read Moreगाँव के आख़िरी छोर पर मिट्टी की दीवारों वाला एक घर था,उसी में रहता था हरिहर तीन बीघा बंजर-सी ज़मीन,
Read Moreहर शाम पार्क में लोग उसे उसी बेंच पर देखते थे। दाईं ओर एक कुर्सी हमेशा खाली रहती। न कोई
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