गीत
गिर रही है रोज़ ही, क़ीमत यहाँ इंसान कीबढ़ रही है रोज़ ही, आफ़त यहाँ इंसान की न सत्य है,
Read Moreवक्त की आवाज यही हैहम आपसी मन-मुटाव भुलाएंजाति-पाति का सब भेद मिटाकरएकता के सूत्र में बंध जाएं। सगरे विश्व की
Read Moreकरनी गर नेक रखेंगे तो फिर यूँ पछताना कैसा?कुछ तो लोग कहेगे, बातों से डरजाना कैसा?जीवन की आपधापी संघर्ष कहानी
Read Moreतुम भी भागो, मैं भी भागूं, भागो,भागम – भाग लगी।सबको ही अधिकार चाहिए, ड्यूटी लगती नहीं सगी।। पहले लूटो अपने
Read Moreरखना जीवन में सदा, यही आत्म सम्मान।दृढ़ निश्चय विश्वास से, ऊंची रहे उड़ान। छू लेना आकाश को, कर सपने साकार।हिम्मत
Read Moreधूप क्यों शरमा रही हैआ गया है मीत अगहन। भोर अँगड़ाई लिएअब उठ गई हैएक पिड़कुलियाभजन गाती उठी हैदाल अरहर
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