दोहा छंद
आशीष आज कौन अब दे रहा, आप बताओ भाव।सबको अब आशीष भी, लगता जैसे घाव।। मातु-पिता आशीष लो, गुरुजनों के
Read More१नन्ही-नन्ही आँख में,सपनों का संसार।टैब संग सीख रहा,उज्ज्वल हो व्यवहार॥२मन लगाकर देखता,नई-नई हर बात।खेल-खेल में सीखता,जीवन की सौगात॥३जिज्ञासा की रोशनी,चमके
Read Moreसबके मन में दर्द है, सबकी अपनी पीर।हँसते चेहरे ढाँपते, भीतर की तस्वीर॥ धूप मिली तो क्या हुआ, छाया भी
Read Moreनन्हे-नन्हे पाँव हैं, सपनों की उड़ान।बचपन की किलकारियाँ, घर की हैं पहचान॥ साइकिल, गुड़िया, खिलौने, मन में भरे उमंग।हँसते-गाते बालपन,
Read Moreमन में हो सद्भावना, अच्छे सोच विचार।बोले मधुर बोल से, रखता शिष्टाचार।।मानव पावन सा लगे, सच में देव समान।सदा भले
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