दोहा श्रद्धा सुमन
माँ कुष्मांडा ध्याइये प्राणशक्ति संचार।वरदायिनी मंगलकरनि सूक्ष्म जगत आधार।। शुद्ध स्वरूपा भगवती करुणामयी कामारि।जगजननी त्रिपुरेश्वरी बीजमंत्र हीं मानि।। भयहारिणी मंगलकरनि
Read Moreमाँ कुष्मांडा ध्याइये प्राणशक्ति संचार।वरदायिनी मंगलकरनि सूक्ष्म जगत आधार।। शुद्ध स्वरूपा भगवती करुणामयी कामारि।जगजननी त्रिपुरेश्वरी बीजमंत्र हीं मानि।। भयहारिणी मंगलकरनि
Read Moreदीपोत्सव की रात में, मन का दीप जलाय। ज्ञान ज्योति आलोक दे, सत की राह दिखाय।। दीपों की रोशनी से,
Read More-: दोहा :- बात हमारी तुम सुनो,मित्र मेरे यमराज। आओ
Read Moreसत्य साधकर गति करो,तब ही बनो महान।केवल सच से ही बने,इंसाँ नित बलवान।। सत्य चेतना को रखे,जिसमें रहे विवेक।रीति-नीति को
Read Moreशुभ दीवाली आ गई झूम रहा संसार।माँ लक्ष्मी का आगमन सजे सभी घर द्वार।। सुख वैभव सबको मिले मिले प्यार
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