दोहा मुक्तक
मर्यादा मर्यादा का अब कहाँ, रखता मानव ध्यान।कारण वो तो हो गया, आज बड़ा विद्वान।देख-देख कर सभ्यता, डरी हुई आज,कलयुग
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Read Moreधरम-करम का पालन करै, गीता सै उपदेश,सच माने तो हरि बसै, हरियाणा परदेश! अमन-चैन की धरती सै, वेदां का ज्ञान,मिट्टी
Read Moreमाँ कुष्मांडा ध्याइये प्राणशक्ति संचार।वरदायिनी मंगलकरनि सूक्ष्म जगत आधार।। शुद्ध स्वरूपा भगवती करुणामयी कामारि।जगजननी त्रिपुरेश्वरी बीजमंत्र हीं मानि।। भयहारिणी मंगलकरनि
Read Moreदीपोत्सव की रात में, मन का दीप जलाय। ज्ञान ज्योति आलोक दे, सत की राह दिखाय।। दीपों की रोशनी से,
Read More-: दोहा :- बात हमारी तुम सुनो,मित्र मेरे यमराज। आओ
Read Moreसत्य साधकर गति करो,तब ही बनो महान।केवल सच से ही बने,इंसाँ नित बलवान।। सत्य चेतना को रखे,जिसमें रहे विवेक।रीति-नीति को
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