हायकु शिव शंकर, करे जब तांडव, मिटे दानव।। कैलाश नाथ, सिर पर हो हाथ, तरे संसार।। बड़े बुजुर्ग, हो आदर
Read Moreहायकु शिव शंकर, करे जब तांडव, मिटे दानव।। कैलाश नाथ, सिर पर हो हाथ, तरे संसार।। बड़े बुजुर्ग, हो आदर
Read Moreएक घाट का जलसबके अधरों परसमान प्यास धूप तपती हैछाँव बाँटती धरतीमिटे विभाजन माटी की खुशबूरोटी की गर्माहटसाझा धड़कन एक
Read Moreढलती धूप कहेपत्तों पर अंतिम स्पर्शसमय मुस्काए शाख से गिरकरपत्ता धरती से मिलेचक्र पूर्ण हुआ साँझ की निस्तब्धपगडंडी सुनसान हैकदम
Read Moreधूप की रेखाटूटी दीवारों परअब भी चमकती साँसों की लयशून्य में भी सुनाईधीमी पर दृढ़ सूखे पत्तेपांवों तले कहतेचलते रहो
Read Moreपतझड़ की हवा,रिश्तों के रंग उड़े,साँसें गुम हो गईं। सूखे पत्तों में,बीती यादें बिखरी हैं,हृदय रोता है। सन्नाटा छाया,बातें अधूरी
Read Moreपत्ते झरते हैंवायु में फुसफुसाहटमन खामोश है सागर की लहरेंचट्टानों से टकरातींगूंज उठती हैं अँधेरी रात मेंसुरज की लाल किरणरोशनी
Read Moreरात की खामोशीदिल की गहराई में गूंजतीअधूरी आस सन्नाटा बोलेछुपे सपनों की परतेंटूटते मन के रंग पवन की सरसराहटभूले हुए
Read Moreसन्नाटे की छाया,पतझड़ पत्तों की तरह,अकेले कदम चलते। चाँदनी रात में,साया भी कहता है,कौन सुनता है दिल की। हवाओं की
Read Moreछोटे कदम बढ़ाएअँधेरे में भी रोशनीमन ने दी हिम्मत सपनों की उड़ानभूल न सके अपने भयहवा से बातें करें नदी
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