तन्हा की दर्द भरी कहानी
सन्नाटा कमरे में,छायाएँ फर्श पर फैलीं,हृदय फुसफुसाए दुःख। पतझड़ की पत्तियाँ गिरें,हर एक अकेली कहानी कहे,हवा उनका शोक ले जाए।
Read Moreसन्नाटा कमरे में,छायाएँ फर्श पर फैलीं,हृदय फुसफुसाए दुःख। पतझड़ की पत्तियाँ गिरें,हर एक अकेली कहानी कहे,हवा उनका शोक ले जाए।
Read Moreसन्नाटा पोखर का,प्रभात की लहरें नाचें,सत्य फुसफुसाता। ऊँचे पर्वत शिखर,बादल बहते विचारों संग,उत्तर भीतर हैं। पतझड़ की पत्तियाँ,हर एक कहती
Read Moreसागर की लहरेंधीरे-धीरे किनारे को छूतीसमय सबको सिखाए बादलों के बीचसूरज की किरणें झिलमिलाएंअँधेरा दूर होता पेड़ों की छाँव मेंपंछी
Read More1 जीवन रेखाअदृश्य सी हो रहीनदी की व्यथा2नदी का जलबहेगा अविरलरखो निर्मल3बहती नदीदेती एक संदेशचलते रहो — निर्मल कुमार दे
Read Moreचुपचाप बहती,ज्ञान की नदी गहरी,मन को छू ले। मृदु शब्दों में,दुखियों का सहारा बने,करुणा सदा। समान धूप-छाँव,सबका अधिकार बराबर,समता खिलती।
Read Moreसावधान कदम सेपतझड़ की पत्तियाँ झरेंहवा धीमी बहें नीचे की ओरझील की शांत लहरेंप्रतिबिंब चमके सिर को ऊपर रखेंसूरज की
Read Moreअधूरी रातेंसन्नाटे में गूँज उठेदिल की आवाज़ सपनों की राहअजनबी मंज़िलों मेंखोया सफ़र साया कहीं दूरसंग-साथ का इंतज़ारमन अकेला हवा
Read Moreमैं मानव हूंऔर कुछ नहीं, सच मेंधूप की तरह साँसों में बसीअनगिनत कहानियाँमौन के बीच पगडंडी परपत्थर भी मुस्कुरातेचलते कदमों
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