मातु-पिता की सेवा
माता पिता की कर ले सेवा।खायेगा तू मिश्री मेवा।।मान ले प्यारे मेरा कहना।जीवन का ये सुंदर गहना।। सबके कहाँ नसीब
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Read Moreप्यार की बन्द कर जग में बाजारप्यार नहीं है रे। मूरख कोई व्यापारप्यार है ईश्वर का अनमोल उपहारप्यार के
Read Moreनव जलधारा अवतरित धरा पर,सिक्त हुआ अंतर्मन,विकसित हुईं हृदय-कलिकाएँ,सुरभित गृह-प्रांगण। अव्यक्त भाव हैं अंतस में,विरह-वेदना तज देना,नव आगमन हो तो
Read Moreआज जब आप दोनों हमारे साथ नहीं हैंतब लगता है मैं एकदम अकेला हो गया हूँ,सुख-समृद्धि, मान सम्मान के बाद
Read Moreआइए! नया आरंभ करते हैंनव संकल्प का जयघोष करते हैं।कम से कम कुछ तो नव आरंभ करते हैंहृदय की वेदना
Read Moreआज प्राथमिकताओं के आगे रिश्ते कहाँ हैं टिकतेअनमोल जो होते थे कभी आज कौड़ियों के भाव हैं बिकतेकभी रिश्तों में
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