कविता

कविता

अनुराग वृष्टि

नव जलधारा अवतरित धरा पर,सिक्त हुआ अंतर्मन,विकसित हुईं हृदय-कलिकाएँ,सुरभित गृह-प्रांगण। अव्यक्त भाव हैं अंतस में,विरह-वेदना तज देना,नव आगमन हो तो

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