हत्या का कलंक न लगे रिश्तों में
रिश्तों की डोरधीरे-धीरे टूटे,शब्दों की मार। मन के आँगनविश्वास के दीपकक्यों बुझ जाते। चेहरे हँसते,भीतर मौन हिंसाघर बना लेती। क्रोध
Read Moreरिश्तों की डोरधीरे-धीरे टूटे,शब्दों की मार। मन के आँगनविश्वास के दीपकक्यों बुझ जाते। चेहरे हँसते,भीतर मौन हिंसाघर बना लेती। क्रोध
Read Moreजिसे देखो वो ही भाग रहा अपनों से जुदा हो रहा पर जा कहाँ रहा है उसको खुद पता नहीं
Read Moreये चिलचिलाती भीषण गर्मी और प्यास तन-मन,अधीर थका मांदा रूखा-सुखा सा हुआ है जीवन,नौ तपा ने भी दिखाया अब ज्वलंत
Read Moreहरियाणा की धरती को लंबे समय तक पारिवारिक प्रेम, भाईचारे और संयुक्त परिवारों की संस्कृति के लिए जाना जाता रहा
Read Moreभीषण गर्मी के दिनों में जब सूर्य की तपिश धरती को झुलसाने लगती है, तब एक घूंट ठंडा पानी जीवन
Read Moreजब सुधार के नाम पर व्यवस्था ही संकट बन जाए, तब शिक्षा तंत्र पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सीबीएसई ने
Read Moreसमाज में वृद्धजन, विधवाएं और दिव्यांगजन सबसे संवेदनशील वर्गों में आते हैं। सरकार द्वारा दी जाने वाली पेंशन योजनाओं का
Read Moreसृष्टि के लिए पुरुष और नारी दोनों ही समान रूप से आवश्यक हैं फिर नर और नारी में आज भी
Read Moreहाँ, मैं छोटे दुकानदार के रूप में कॉकरोच हूँ। मैं वही आदमी हूँ जिसकी दुकान में टँगी ट्यूबलाइट से ज्यादा
Read Moreभक्ति की आँधी चली, डोला फिर इंसाफ।जेलों से भी लौटकर, मिलता वैभव-लाभ।। कल जिन पर आरोप थे, गूँजा था दरबार,आज
Read More