हास्य-व्यंग्य : काकरोच बेचारा बेरोजगार
काकरोच बेचारा एक बेरोजगार प्राणी है। पढ़ा-लिखा है। ग्रेजुएट की डिग्री है। मास्टर की भी डिग्री है फिर भी बेचारा
Read Moreकाकरोच बेचारा एक बेरोजगार प्राणी है। पढ़ा-लिखा है। ग्रेजुएट की डिग्री है। मास्टर की भी डिग्री है फिर भी बेचारा
Read Moreचुप्पियों के बीचजब शब्द साँस लेते हैंवही गुफ्तगू है नज़रें कह देती हैंजो होंठ नहीं कह पातेभावों की भाषा हवा
Read Moreजब 1826 में पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने कलकत्ता से ‘उदंत मार्तंड’ का प्रकाशन किया, तो यह सिर्फ एक अखबार
Read Moreगलियों में डर का साया है,हर चेहरा अब घबराया है।नन्हें मासूमों की चीखों से,शहर-गाँव तक कपाया है। कभी इन बच्चों
Read Moreकिसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक शक्ति केवल चुनावों, संसदों और संवैधानिक संस्थाओं से निर्धारित नहीं होती, बल्कि इस बात
Read Moreडॉनल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल ने विश्व राजनीति को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहाँ हर दिन नई
Read Moreआज का समय अभिव्यक्ति का समय है। सोशल मीडिया, ब्लॉग, डिजिटल मंच और स्वयं-प्रकाशन के साधनों ने हर व्यक्ति को
Read Moreजनगणना प्रगणकों की सूची जारी,प्रशिक्षण की मजबूत तैयारी,प्रशिक्षकों ने बताया किकार्य में पूरी तरह जान डालना है,एक एक तथ्य खोज
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