गीत/नवगीत

गूंगे थे, अंधे बने, सुनती नहीं पुकार

गूंगे थे, अंधे बने, सुनती नहीं पुकार,धृतराष्ट्रों के सामने, गई व्यवस्था हार॥ सत्ता के गलियार में, गूंजे केवल शोर,सत्य यहाँ

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