वक्त बदलता दे रहा, कैसे-कैसे घाव
वक्त बदलता दे रहा, कैसे-कैसे घाव,माली बाग़ उजाड़ते, मांझी खोए नाव॥ अपनों से अपने नहीं, रखते आज लगाव,रिश्तों की हर
Read Moreवक्त बदलता दे रहा, कैसे-कैसे घाव,माली बाग़ उजाड़ते, मांझी खोए नाव॥ अपनों से अपने नहीं, रखते आज लगाव,रिश्तों की हर
Read Moreगूंगे थे, अंधे बने, सुनती नहीं पुकार,धृतराष्ट्रों के सामने, गई व्यवस्था हार॥ सत्ता के गलियार में, गूंजे केवल शोर,सत्य यहाँ
Read Moreहाँ बेटा, मैं तुझे अंधेरे से बचाना चाहता हूँ,जीवन के कुछ मूल सूत्र समझाना चाहता हूँ। ये सही है, मेरा
Read Moreनन्हे हाथों में हरियाली,जैसे धरती का उपहार,छोटा-सा मन, बड़ी खुशी,आँखों में सारा संसार। कदम-कदम पर चलता जाए,सपनों की है राह,कभी
Read Moreएक समय था जब बारात का आना केवल एक परिवार का दूसरे परिवार तक पहुँचना नहीं, बल्कि पूरे गाँव का
Read Moreरोज मर्रा की इस भाग दौड़ मेंबनावटी पन के इस विकट दौर मेंज़िन्दगी तू किस मोड़ पर आ फंसीकहां खो
Read Moreआज सुबह-सुबह मित्र रमराज ने मुझे फोन करके कहा- प्रभु! आप बेवकूफ हैं। मैंने हँसते हुए पूछा -यह बात तुझे
Read Moreचेहरे पर जमी थकान की परतें और आँखों में ठहर गया तनाव कई बार मुस्कान को भी एक औपचारिक अभिनय
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