व्यंग्य – झोले में झमेला
झोला उठाना पुराने समय में खराब होता होगा। लेकिन आज के समय में झोला उठाने वाला सबसे ज्यादा चुस्त- दुरूस्त
Read Moreझोला उठाना पुराने समय में खराब होता होगा। लेकिन आज के समय में झोला उठाने वाला सबसे ज्यादा चुस्त- दुरूस्त
Read Moreआज सालों बाद खुला सँदूकतो उसमें मिली कुछ चिठ्ठियाँ ,चिठ्ठियों के दिन पुरे हो चुके थेपीले पड़ गए पुराने पृष्ठजगह-
Read Moreचाँदनी रात आई प्यारी,सितारों ने जगे सारी।नन्हे पंछी गा रहे गीत,हवा में है मीठी प्रीत। तारों की चमक संग-संग,सपनों की
Read Moreऐसे-ऐसे बोलते हैं हमें-हमलोगों को रोज-रोज़चमार तो कभी चमरोटाकह कर बुलाते हैं। ऐसे-ऐसे बोलते हैं हमें-नाली के कीड़े जैसीजात है
Read Moreजब से मैंने होश संभाला,मां-बाप ने विद्यालय में डाला,गुरुजनों और साथियों ने साथ निभाया,शब्दों को कैसे गढ़ना है—यह हुनर सिखाया।
Read Moreजलवायु परिवर्तन के इस निर्णायक दौर में चरम गर्मी अब केवल एक मौसमी विचलन नहीं रह गई है; यह एक
Read Moreहमारे देश के सर्वोच्च कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस हिरासत में हिंसा और मौत को व्यवस्था पर एक धब्बा बताया
Read Moreमंच हुए साहित्य के, गठजोड़ी सरकार,सभी बाँटकर ले रहे, पुरस्कार हर बार॥ कला नहीं अब माप है, संबंधों का जाल,योग्यता
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