अपने क्रोध को काबू में रखें
आज के युग में हर व्यक्ति को जीवन के किसी न किसी पड़ाव में विपरीत परिस्थितियों का निर्माण होने के
Read Moreआज के युग में हर व्यक्ति को जीवन के किसी न किसी पड़ाव में विपरीत परिस्थितियों का निर्माण होने के
Read Moreखाली घर खाने को दौड़ता है अब कभी यहाँ हलचल थी आज सन्नाटा है पसरा रोनकों का दौर भी खत्म
Read Moreएक ज़माना था जब हमारे घरों में माताएं लकड़ी और कोयले से जलते चूल्हे पर रोटी और चावल पकाते और
Read Moreहोली अब हो लीअब ना करो ठिठोली।चलो फिर लड़े झगड़े।चले दनादन फिर बत गोली।अमन चैन से तुम बैठो ।तो घर
Read Moreप्यासी धरती तपस्विनी सी ताक रही है अम्बर को।थोड़ा जल बरसा दे रे मेघा, रोक दे ऐसे मंजर को। जगह-जगह
Read More“पापा इस बार मैं घर नहीं आ पाऊँगा गर्मी की छुट्टीयों में,क्योंकि अपने लिए एक फ्लैट लेने की सोच रहा
Read Moreक्यों? याद आते हैं उन्हें ‘हमेशा’ सिर्फ़ हक़,मुश्किल में पालक दिल नहीं जाता धड़क।सिर्फ लेना ही लेना क्योंकर उन्हें हैं
Read Moreनन्हे बच्चे मैदान आए,खेलने का मन बनाए।हाथ में बैट, गेंद भी लाल,खेल लगे सबको कमाल। अंकल पास खड़े मुस्काएँ,“शाबाश!” कहकर
Read Moreमनुष्य के बौद्धिक विकास में पढ़ने की आदत अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन केवल पढ़ना ही पर्याप्त नहीं है;
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