उपन्यास : उम्र (सातवीं कड़ी)
शहर पहुंचकर चौक पर बस रुकी रमेश थैला लेकर, और बैग लटकाए बस से नीचे उतरा, रमेश ने उतरते ही
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Read Moreकृष्ण को अच्छी तरह याद था कि उसी दिन राजसभा में कौरवों के सन्देशवाहक के आने पर क्या-क्या बातें हुई
Read Moreकुछ ही देर में अनिल मामाजी ने दरवाजे पर दस्तक दी, शंकर घर में कहीं जाने के लिए तैयार बैठा
Read Moreरात को ना ज्यादा ठण्ड थी और ना अधिक गर्मी मामी जी चौके पर भोजन की तैयारी में लग गयी
Read Moreअब कृष्ण इस राजसभा के बाद की घटनाओं पर विचार करने लगे। पांडवों के पुरोहित ऋषि धौम्य युधिष्ठिर का सन्देश
Read Moreरमेश को पापा का रोज इस तरह अखबारों में उसके लिए इश्तिहार देखना शायद बिलकुल स्वीकार नहीं था!! जीवन की
Read Moreशाम के वक़्त रमेश को ज्यादा काम नहीं होता था, मुश्किल से कुछ देर पढ़ पाता और माँ खाने के
Read Moreराजा विराट ने विराट नगर के पास ही उपप्लव्य नगर में पांडवों के निवास का स्थान दे दिया था। वहीं
Read Moreरमेश ने इन सारी समस्याओं का हल निकाल लिया उसने दिल्ली जाने का विचार बनाया! आकाश से इस बारे में
Read Moreआकाश एक सुलझा हुआ शख्स था. उसके व्यापारिक मित्रों में उसकी अच्छी पैठ थी. पिछले साल जब उसने अपनी नयी
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