वसुंधरा
अभिलाषा है मित्र, सजाऊँ वसुंधरा को। प्रतिभा का सम्मान, सहेजूँ ऋतंभरा को। हरे भरे हो वृक्ष, जीव आनंदी सारे। शिव
Read Moreमन की आँखें खोलिए, और लीजिए ज्ञान।इतना भी अच्छा नहीं, मुफ्त बाँटना दान।।मुफ्त बाँटना दान, सुनो मत नाहक सबकी।निर्णय अंतिम
Read Moreजंतर-मंतर के लिए,लगे रहे दिन रातझारखण्ड के लिए वे, करें न कोई बातकरें न कोई बात, गजब की है बेशर्मीअब
Read Moreगुरुवर के आशीष से, खिलता जीवन बाग। सप्त सुरों के साज से, गूँजे मधुरिम राग। ज्ञान रुपी संजीवनी, शिक्षा करे
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