कलाधर घनाक्षरी
दान धर्म श्रेष्ठ कर्म, प्रीत पुष्प नेह मर्म, दंभ द्वेष हो न दर्प, धीर धैर्य धारिए।। रिद्धि सिद्धि बुद्धिमान, आन
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Read Moreकुंडलियां छंद उलझे मन की डोर जब, हिय में हो संग्राम। योग ध्यान से ही सखा, मन पर कसे लगाम।।
Read Moreयोगी से ले लीजिए, बुलडोजर श्रीमानसरमा जी से लीजिए,चुन-चुन खनक बयानचुन-चुन खनक बयान,मरें सारे खल-कामीयूसीसी ले आव, लगाए जैसा धामीकह
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