वचन आठवाँ भी अब सुन लो
वचन आठवाँ भी अब सुन लोबिना न इसके ब्याह। सहधर्मी की संगधर्मिणीदेना देकर कान पति की हत्यानहीं करोगी धरो हृदय
Read Moreवचन आठवाँ भी अब सुन लोबिना न इसके ब्याह। सहधर्मी की संगधर्मिणीदेना देकर कान पति की हत्यानहीं करोगी धरो हृदय
Read Moreसूर्य को भी चंद्र कहने पर तुले हैं,दृष्टि में है दोष, या फिर मति मलिन है।। शत्रुओं के सामने घुटनों
Read Moreजब भी खोलूँ खिड़की द्वार,दिखे नभ मेघ का प्रणय अपार। करते दोनो लुका छिपी,रहते मिल के हँसी खुशी। बादल के
Read Moreइतनी जल्दी न हथियार डाल आओ।बेबस हो कर मत आँसू बहाओ। मकड़ी से सीखो महीन धागों से जाल बुनना,पक्षिणी से
Read Moreबरगद की घनी छाया है पिताछाँव में उसके भूलता हर दर्द। पिता करता नहीं दिखावा कोईआँसू छिपाता अन्तर में अपने।तोड़ता
Read Moreहर रोज़ घर से कमाने निकलना हैआग के दरिया से मुझको गुज़रना हैतमन्नाओं को अपनी खुद ही कुचलना हैजीने की
Read Moreआओ फिर से बात करें हम, बातों से कुछ हल निकलेगामन की उलझन भी कम होगी, अहम् का हिम पर्वत
Read Moreनिंदा करता निंदक अच्छा, जो कहता है कहने दो।सुनना धर्म हमारा है सब, रहने दो अब जाने दो।जब दिन होते
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