गीत
तुमने पाया जिसको करके सौ जतन था हे मनुजसच बताना आज उसका मोल क्या कुछ भी नहीं है? पाँव के
Read Moreसत्ता पाने के लिए, रचें नए षड्यंत्र।देश विरोधी शक्तियाँ, फूँक रहीं विष-मंत्र॥ झूठ-फरेबी जाल में, उलझा सारा देश।स्वार्थों की इस
Read Moreभारत माँ की पीर का, किसको है अब ख्याल।देश बनाने आ गए, डाकू, नटवरलाल॥ सत्ता इनके हाथ से, फिसली जिस
Read Moreसत्ता का अभिमान जो, चढ़ता सिर पर आज।जन-विश्वास ही ताज है, बाकी सब अंदाज़॥ ऊँचे पद पर बैठकर, भूले अपनी
Read Moreराष्ट्र प्रथम का भाव हो, यह सच्चा परिवेश।देश-विरोधी सोच से, होता केवल क्लेश॥ मिट्टी जिसकी देह में, बसे श्वास में
Read Moreरिश्ते बहुत नाजूक होते हैं,क्या खोया है क्या पाया है,आत्म परिक्षण करके अपना,रिश्तों में अपनापन ढूंढें । बचपन और जवानी
Read Moreमन था निर्मल, प्रेम था, मधुर वचन की छाँव।अपने ही जब घाव दें, बदल गया स्वभाव॥ हँसकर हर पीड़ा सही,
Read Moreगौरव का इतिहास चाहिए वेद, पुराण बहुत बाँचा है, गीता ज्ञान सदा है बांटा।सत्य, अहिंसा की फसलों को,छिपी हुई दीमक
Read Moreहर पल का शुकराना,हर साँस का शुकरानातेरी दी हर धड़कन,हर आस का शुकराना।सूनी राहों में भी तूने उजियारा भर डालाहे
Read Moreजब जागे हैं, तभी सबेरा। जगना अब जीवन के लिए। पढ़ना-लिखना हुआ बहुत, लिखना अब जीवन के लिए। धर्म कर्म
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