रिश्तों की अलमारी
पूछती हूं तुम से खता क्या थी हमारी ,ढूंढती रही मैं रिश्तों की वो अलमारी ।कहीं खो गयी है वो
Read Moreपूछती हूं तुम से खता क्या थी हमारी ,ढूंढती रही मैं रिश्तों की वो अलमारी ।कहीं खो गयी है वो
Read Moreसूरज बाबा क्यों गुस्सा हो?हम सबको क्यों रहे हो भून!करवा दो न! रिमझिम वर्षा,जल्दी से भेजो मानसून। सूख रहे हैं
Read Moreअंधियारे में बन प्रकाश पुंज जगमग जलना सीखो तुम,टूटी हुई उम्मीदों को फिर से हँसकर चुनना सीखों तुम । जीवन
Read Moreकुछ श्वाँसों की सरगम के हों, कुछ सीने की धड़कन के हों।कुछ गीत तुम्हारे मन के हों, कुछ गीत हमारे
Read Moreसत्य भोगता दुख जीवन में, पाता है अपमान यहाँ।झूठे और फरेबी का ही होता है सम्मान यहाँ। मूल्य हीन नर
Read Moreनहीं दाल में कालासारी दाल हो गई काली। राम दान केसभी लुटेरेपहने पीत चदरियातिलक लगाए रामचन्द्र काबसते औध नगरियाराम पाँव
Read Moreरिश्ते यदि हों घाव बन, बढ़े निरंतर पीर।स्वयं बचाने मौन ही, बन जाता तब धीर॥ मन के भीतर टूटते, कितने
Read Moreनाम-पता सब देह के, जग के मात्र निशान।आत्मा का परिचय कहाँ, लिख पाए इंसान॥ मोबाइल, घर, गाँव सब, बदलें दिन
Read Moreजंजीरें यदि न कट सकें, बदलो अपनी चाल।लंगड़ाकर चलना भला, मत स्वीकारो जाल॥ बंधन चाहे लाख हों, मत खोना विश्वास।हिम्मत
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