खुद ही अपनी शक्ति बन
मत करना इंतज़ार तू, कोई आए साथ।खुद ही अपनी शक्ति बन, खुद लिख अपनी बात॥ पिता, बंधु या संगिनी, दें
Read Moreमत करना इंतज़ार तू, कोई आए साथ।खुद ही अपनी शक्ति बन, खुद लिख अपनी बात॥ पिता, बंधु या संगिनी, दें
Read Moreमौन अधर पर था कभी, नयनों में थी पीर।अब स्वर बने बोलती, बदली खुद तक़दीर॥ बंधन जितने बाँधते, उतनी बढ़ती
Read Moreघर-आँगन की छाँव में, पलते प्रेम-विचार।लोभ लगा जब मन कहीं, टूटे सब परिवार॥ माटी केवल खेत की, नहीं हृदय का
Read Moreकोई यहाँ कबीर है, लगता कोई मीर।भीतर-भीतर है छुपी, सबके कोई पीर।। हँसते चेहरों के तले, दर्दों की जागीर।बाहर सावन-सा
Read Moreबादल है पर बूँद नहीं, कैसी ऋतु की चाल।प्यासे मन की देह पर, सूखा हर इक ताल॥ धरा तड़पती देखिए,
Read Moreपत्थर भी अपने चले, अपने ही थे हाथ।फिर कहते निर्दोष हैं, कैसी झूठी बात॥ आग लगाकर बस्तियाँ, करते ऊँची बात।आँसू
Read Moreधरती डोली एक पल, काँपे घर-दरबार।रोया सारा देश फिर, टूटा जन-आधार॥ मलबों में दबते रहे, कितने सपने-प्राण।भाषण देते रह गए,
Read Moreमार्क, सच मानो, मैं तुमसे ज़रा भी इत्तेफाक नहीं रखता,सांख्यिकी ज्ञान, सफेद झूठ के परे, दर्ज हो नहीं सकता॥ जन्म
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