रिश्तों में अपनापन ढूंढें
रिश्ते बहुत नाजूक होते हैं,क्या खोया है क्या पाया है,आत्म परिक्षण करके अपना,रिश्तों में अपनापन ढूंढें । बचपन और जवानी
Read Moreरिश्ते बहुत नाजूक होते हैं,क्या खोया है क्या पाया है,आत्म परिक्षण करके अपना,रिश्तों में अपनापन ढूंढें । बचपन और जवानी
Read Moreमन था निर्मल, प्रेम था, मधुर वचन की छाँव।अपने ही जब घाव दें, बदल गया स्वभाव॥ हँसकर हर पीड़ा सही,
Read Moreगौरव का इतिहास चाहिए वेद, पुराण बहुत बाँचा है, गीता ज्ञान सदा है बांटा।सत्य, अहिंसा की फसलों को,छिपी हुई दीमक
Read Moreहर पल का शुकराना,हर साँस का शुकरानातेरी दी हर धड़कन,हर आस का शुकराना।सूनी राहों में भी तूने उजियारा भर डालाहे
Read Moreजब जागे हैं, तभी सबेरा। जगना अब जीवन के लिए। पढ़ना-लिखना हुआ बहुत, लिखना अब जीवन के लिए। धर्म कर्म
Read Moreपूछती हूं तुम से खता क्या थी हमारी ,ढूंढती रही मैं रिश्तों की वो अलमारी ।कहीं खो गयी है वो
Read Moreसूरज बाबा क्यों गुस्सा हो?हम सबको क्यों रहे हो भून!करवा दो न! रिमझिम वर्षा,जल्दी से भेजो मानसून। सूख रहे हैं
Read Moreअंधियारे में बन प्रकाश पुंज जगमग जलना सीखो तुम,टूटी हुई उम्मीदों को फिर से हँसकर चुनना सीखों तुम । जीवन
Read Moreकुछ श्वाँसों की सरगम के हों, कुछ सीने की धड़कन के हों।कुछ गीत तुम्हारे मन के हों, कुछ गीत हमारे
Read Moreसत्य भोगता दुख जीवन में, पाता है अपमान यहाँ।झूठे और फरेबी का ही होता है सम्मान यहाँ। मूल्य हीन नर
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