बीज का स्वप्न
बीज का स्वप्न ले प्रारब्ध को, फूटे महि के बीच।स्वर्णिम मन में ख्वाब लिए तब, लेता आंखें मीच।नया परिवेश कैसा
Read Moreबीज का स्वप्न ले प्रारब्ध को, फूटे महि के बीच।स्वर्णिम मन में ख्वाब लिए तब, लेता आंखें मीच।नया परिवेश कैसा
Read Moreदृष्टि बदलते ही खुला, जीवन का विस्तार।मन ही बाँधे देह को, मन ही दे उद्धार॥ तारे दूर नहीं कभी, दूरी
Read Moreमौन-पथों पर जो चला, पाया अपना ठौर।भीतर जागा जब स्वयं, मिट गए सब छोर॥ हर यात्रा पैरों बिना, चलती मन
Read Moreघर आँगन की छाँव है, जीवन का विश्वास।ईंटों से बढ़कर सदा, रिश्तों भरी सुवास॥ दीवारों में कैद हैं, बचपन के
Read Moreधर्म नहीं बाज़ार है, श्रद्धा ज्यों व्यापार।लोभी जहाँ प्रधान हो, सूना हर दरबार॥ धर्म बना व्यवसाय जब, खो बैठा संस्कार।भूखे
Read Moreगुरु दीपक सम ज्ञान के, हरें सब अँधियार।जीवन आलोकित करें, बनकर सत्य-विचार॥ शब्द नहीं बस सीख हैं, जीवन का आधार।गुरु
Read Moreआज है गुरु पूर्णिमा का दिनआओ गुरु का ह्रदय में ध्यान धरेंऔर सब काम बाद में कर लें गेपहले सदगुरु
Read More