माता-पिता की शरण में अनंत वैकुण्ठ सुख समाया
माता-पिता की शरण में,अनंत वैकुण्ठ सुख समाया है,उनके चरणों में ही जीवन का सच्चा उजियारा छाया है।मंदिर-मस्जिद, तीर्थ सभी अपनी-अपनी
Read Moreमाता-पिता की शरण में,अनंत वैकुण्ठ सुख समाया है,उनके चरणों में ही जीवन का सच्चा उजियारा छाया है।मंदिर-मस्जिद, तीर्थ सभी अपनी-अपनी
Read Moreमैं भारत का फौजी हूँ भारत के गीत मैं गाता हूँजो देशभक्त हैं उनके लिए मैं यह कविता सुनाता हूँबेशक
Read Moreसोनम की बेवफ़ाइयाँ, बन बैठीं पहचान।छल के रिश्ते टूटते, खो जाता सम्मान॥ मीठे-मीठे बोल थे, मन में छिपा प्रपंच।विश्वासों की
Read Moreसत्ता से बढ़कर सदा, जनता का विश्वास।सेवा, सच, समर्पण ही, नेतृत्व की आस॥ सत्ता चाहो या चुनो, जन-जन का सम्मान।स्वार्थ
Read Moreसत्ता पाने के लिए, रचें नए षड्यंत्र।देश विरोधी शक्तियाँ, फूँक रहीं विष-मंत्र॥ झूठ-फरेबी जाल में, उलझा सारा देश।स्वार्थों की इस
Read Moreभारत माँ की पीर का, किसको है अब ख्याल।देश बनाने आ गए, डाकू, नटवरलाल॥ सत्ता इनके हाथ से, फिसली जिस
Read Moreसत्ता का अभिमान जो, चढ़ता सिर पर आज।जन-विश्वास ही ताज है, बाकी सब अंदाज़॥ ऊँचे पद पर बैठकर, भूले अपनी
Read Moreराष्ट्र प्रथम का भाव हो, यह सच्चा परिवेश।देश-विरोधी सोच से, होता केवल क्लेश॥ मिट्टी जिसकी देह में, बसे श्वास में
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