मुक्तक
रखना हो रिश्तों को कायम, किसी लम्बे काल तक,जेब खुली, मुँह बन्द, समझौता करो हर हाल तक।क्या हुआ, किसने किया,
Read Moreजानते हैं बिल्ली को कुत्ते से लड़ाना,शांति के पुजारी को आतंकी बताना।धर्म और संस्कृति की बातें भुलाकर,सत्ता की खातिर, रिश्तों
Read Moreचैत्र शुक्ल प्रतिपदा को, छाया नूतन हर्ष।नई चेतना दे रहा, नव संवत्सर वर्ष। नृपति विक्रमादित्य से, ‘विक्रम संवत’ नाम।उज्जयिनी में
Read Moreकला जन्म से थी हुईं, जीवन की मुस्कान।कनक प्रभा हो पथ चली, शासन माता जान।। सूरजमल जिनके पिता, छोटी बाई
Read Moreवेदों की चर्चा बहुत, मंचों पर दिन-रात।भूखे की पीड़ा पढ़ो, समझो हुआ प्रभात॥ ग्रंथों से ऊँची हुई, भाषण की हर
Read Moreभारत के गणतंत्र की, ये कैसी है शान।भूखे को रोटी नहीं, बेघर को पहचान॥ सब धर्मों के मान की, बात
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