दोहा मुक्तक
चलो मृत्यु से हम करें, मिलकर दो-दो हाथ।आपस में सब दीजिए, इक दूजे का साथ।मुश्किल में मत डालिए, नाहक अपनी
Read Moreचलो मृत्यु से हम करें, मिलकर दो-दो हाथ।आपस में सब दीजिए, इक दूजे का साथ।मुश्किल में मत डालिए, नाहक अपनी
Read Moreसंसद में मचता गदर, है चिंतन की बात।हँसी उड़े संविधान की, जनता पर आघात।। भाषा पर संयम नहीं, मर्यादा से
Read Moreमर्यादा मर्यादा का अब कहाँ, रखता मानव ध्यान।कारण वो तो हो गया, आज बड़ा विद्वान।देख-देख कर सभ्यता, डरी हुई आज,कलयुग
Read Moreधरम-करम का पालन करै, गीता सै उपदेश,सच माने तो हरि बसै, हरियाणा परदेश! अमन-चैन की धरती सै, वेदां का ज्ञान,मिट्टी
Read Moreमाँ कुष्मांडा ध्याइये प्राणशक्ति संचार।वरदायिनी मंगलकरनि सूक्ष्म जगत आधार।। शुद्ध स्वरूपा भगवती करुणामयी कामारि।जगजननी त्रिपुरेश्वरी बीजमंत्र हीं मानि।। भयहारिणी मंगलकरनि
Read Moreदीपोत्सव की रात में, मन का दीप जलाय। ज्ञान ज्योति आलोक दे, सत की राह दिखाय।। दीपों की रोशनी से,
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