ग़ज़ल
कुछ ख़बर होने न पायी ख़त्म क़िस्सा कर गयीयक़बयक़ इक ज़िंदगी को मौत धप्पा कर गयी कोई सहरा में नहीं
Read Moreसज गए हैं बप्पा फिर बाज़ारों मेंअब होगा मोल तोल खरीददारों में , कोई पूछेगा—कितने के हैं?कोई कहेगा—थोड़े कम कर
Read Moreमेरी कविता में जनता की आवाज होती है,मेरी कविता में नारी शक्ति की बात होती है,मेरी कविता में जल ,जंगल
Read Moreधरती माँ आज बहुत उदास है,सूनी उसकी हर एक साँस है।कहीं कटते वन, कहीं सूखी धार,सुनो मनुष्य! उसकी करुण पुकार।
Read Moreएहसासों से लिखे जाते हैं जहाँ रिश्ते,शब्दों के मोहताज नहीं होते जहाँ रिश्ते,चारों तरफ से प्यार होता है “परिवार”,स्नेह की
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