बेईमान बहन-भाई और सौतेली मां का ज़ुल्म
वालिद साहब (पिताजी) के इंतक़ाल को अभी चंद ही महीने हुए थे कि घर की फज़ा (माहौल) बिल्कुल बदल गई।
Read Moreवालिद साहब (पिताजी) के इंतक़ाल को अभी चंद ही महीने हुए थे कि घर की फज़ा (माहौल) बिल्कुल बदल गई।
Read Moreसुबह के क़रीबन नौ सवा नौ का ही समय होगा । दिल्ली मेट्रो हर रोज़ की तरह खचाखच भरी हुई
Read Moreपृथ्वी पर केवल एक पेड़ बचा था। उसे काँच के विशाल गुंबद में सुरक्षित रखा गया था। दुनिया भर के
Read Moreबड़े साहब का अचानक विभागीय दौरा आ गया, पूरे विभाग में भगदड़ मच गई। कोई फाइल लेकर इधर से उधर
Read Moreसर्दियों का आग़ाज़ हो चुका था। क़श्मीर की हसीन वादी पर सफ़ेद बर्फ़ की चादर बिछने को बेताब थी। ‘श्रीनगर’
Read Moreशहर में एक नया बैंक खुला—“यादों का बैंक”। यहाँ लोग पैसे नहीं, अपनी यादें जमा करते थे। खुशियों की यादों
Read Moreमेरी डायरी के ये धूल-धूसरित, उदास पन्ने और उनकी हर पंक्ति में सांस लेती तुम्हारी स्मृतियां…आज फिर मैंने इन्हें पलटा,
Read Moreकवि सम्मेलन की नामचीन हस्तियांश्री शैल चतुर्वेदी औरश्री बशीर बद्रशैल जी का आग्रहवाणी वंदना के बाद मुझे पढ़ाएंसंचालक डॉक्टर सतीश
Read Moreरीना को लोग अक्सर “गलत फैसले लेने वाली औरत” कहते थे। लेकिन कोई उसकी कहानी पूरी सुनना नहीं चाहता था।
Read Moreमैं अपने बरामदे में बैठा पहाड़ों की खूबसूरती को देख रहा था । इस बार कई सालों के बाद मैं
Read More