जोहरा टूट गई थी
शहर के शोर से दूर उस पुरानी हवेली की दीवारों पर जमी काई अब सिसकियाँ लेती थी। वह हवेली, जिसे
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Read Moreखंडवा कॉलेज की सर्द शामों की यादेंखंडवा के उस पुराने कॉलेज परिसर की सर्द शामें आज भी मेरे दिमाग़ के
Read Moreहवेली के उस पुराने मेहराबदार दालान में वक्त जैसे थम सा गया था। बाहर पेड़ों की घनी छांव से छनकर
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