कलैंडर
जब भी मौका मिलता है वह चुपके से मेरे आस-पास आकर कुछ अपनी कह कुछ मेरी सुन समीक्षक बन जाता
Read Moreयात्राएँ करना सम्भवतया मेरा स्वभाव ही बन गया था अथवा नियति, लेकिन परिस्थितियों के उतार-चढ़ाव और देश की तत्कालीन परिस्थितियों
Read Moreनित्य नवीन सपने और उन्हें पूरा करने का जुनून ! जीवन से धीरे-धीरे सब कुछ छीन लिया । अहसास होने
Read Moreदीदी,,आपसे एक बात कहनी थी”। मीनू ने अपनी मालकिन से कहा।*हां,बोल, मालकिनसुरेखा ने कहा। मुझे थोड़े पैसे चाहिए थे,वो बेटी
Read Moreमिट्टी की उन पगडंडियों पर, जहाँ सुबह‑सुबह धूप भी संकोच से उतरती है, एक छोटी‑सी लड़की आज फिर घर की
Read Moreरिया को बचपन से ही छायाचित्र लेने का शौक था। जब उसके हमउम्र बच्चे खिलौनों, खेलों और अपने छोटे-छोटे झगड़ों
Read More“वह आज भी गैर जवाबदेही में जी रहा है।” रघु ने अपने बगल गिर की बात सोमारू से बेबाक कही।
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