कहानी – दीप से दीप जलाना
नंदिता रोज अपनी लिखी एक कविता फेसबुक पर पोस्ट करती। सुबह फ्रेश होने के बाद चाय पीकर कविता लिखने बैठ
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Read Moreशत्रुघ्न जी का विलाप सुनकर तीनों माताएँ वहाँ आ गयीं। वे पतिवियोग के दुःख और उपवास के कारण बहुत दुर्बल
Read Moreरीता जी एक बैंक में कैशियर के पद पर कार्यरत हैं। पतिदेव एक मल्टीनेशन कंपनी में जनरल मैनेजर है ।
Read Moreमैं उसकी जादूगरी में गिरफ़्तार होता चला गया , उस से मेरी मुलाक़ात कोई ज़्यादा पुरानी न थी , और
Read Moreरक्षाबंधन की सुबह थी। मुंबई के एक छोटे से अपार्टमेंट में रहने वाली श्रद्धा की आँखें अलार्म के तीसरी बार
Read Moreभरत जी श्री राम के बारे में निषादराज गुह से अधिक से अधिक जान लेना चाहते थे कि वे वहाँ
Read Moreतुम्हारे पैर में लिपटे धागे की कसावट मानों हृदय को जैसे घायल कर दिया हो प्रकृति शान्त और तुम्हारा यूं
Read Moreगुरुजनों की शिक्षा, परिवार का प्रेम और साथ,जीवन यात्रा में जब संघर्षों की बात आती है, तो गुरुजन और परिवार
Read Moreसुबह के चार बजे थे। बाहर अभी भी अंधेरा पसरा था, मगर प्रियंका की नींद खुल चुकी थी। अलार्म बजने
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