गज़ल
आपने उसे शहर में ढूंढा ही नहींफिर कहते हो कि वो मिला ही नहीं ख़ूब खाकर भी लेते नहीं है
Read Moreऐसी रार मचाते आयेतहज़ीबें ठुकराते आये कहने भर के सारे रिश्तेएकतरफ़ा ही निभाते आये सबने छोड़ दिया जब हमकोख़ुद को
Read Moreजैसे भी हो नाम चाहिए।बस हमको आराम चाहिए।। बदनामी की नहीं है चिंता,हमको केवल दाम चाहिए। खेल स्वार्थ का खेल
Read Moreआँख से अब नहीं दिख रहा है जहाँ ,आज क्या हो रहा है मेरे संग यहाँमाँ का रोना नहीं अब
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