गुज़री हुई वो रात
झुक कर ज़रा वो मस्त निगाहें मिला के ला,साग़र में अक्स-ए-ज़ुल्फ़ का जादू जगा के ला। कहते हैं बज़्म-ए-शौक़ में
Read Moreझुक कर ज़रा वो मस्त निगाहें मिला के ला,साग़र में अक्स-ए-ज़ुल्फ़ का जादू जगा के ला। कहते हैं बज़्म-ए-शौक़ में
Read Moreबदल दी हमने राह अपनी वक़्त के रहते रहते,उतार दी ज़ंजीरें-रिश्तों की वक़्त के रहते रहते।थक गए थे हम चिराग-ए-आरज़ू
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