ग़ज़ल
वो धड़कनों में समा रहे हैंसुकूं हम अपना गंवा रहे हैं धरा ने ओढ़ी बसंती चूनरबहारों के मौसम आ रहे
Read Moreमत दीजिए बार-बार झूठे बयान नेताजीअब तो करें सच की पहचान नेताजी दौरे से जब लौटते हो थके हारेव्हिस्की से
Read Moreज़माने से शिकायत तू न करना।किसी से यूं अदावत तू न करना।। अगर है ये ज़माना तेरा दुश्मन।कभी कोई मुरौवत
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