आल्हा छंद गीत – पर्वों से संचार प्रवाह
व्यग्र विकल चिंतारत रहते, उन में पर्व भरें उत्साह ।मानव मन आनंदित होता, पर्वों से संचार प्रवाह ।। नवल राग
Read Moreव्यग्र विकल चिंतारत रहते, उन में पर्व भरें उत्साह ।मानव मन आनंदित होता, पर्वों से संचार प्रवाह ।। नवल राग
Read Moreपल-पल मिलना, पल-पल खिलना, पल-पल बिछड़न ही जीवन है। धोखा, कपट, षडयंत्र तो विष हैं, प्रेम की धड़कन संजीवन है।।
Read Moreजिसने मन को जीत लिया हो,वो न कभी भयभीत हुआ।राह कठिन हो या अँधियारी,सदा वही जगजीत हुआ ।1चाहे धूप जले
Read Moreजैसे ही युद्ध का बिगुल बजातमाम देशों में मच गया कोहरामहजारों लोग अब तक मारे जा चुकेविश्व भर के बाजार
Read Moreमन मन्दिर का मिटे अँधेरा हर घर में खुशहाली हो।धन-धान्य से भरा रहे घर नहीं किसी का खाली हो।रंग –
Read Moreएक ही नारा और एक ही नामजय श्री राम बोलो जय श्री राम।। प्रभु जी करो सबका कल्याणआप हो सभी
Read Moreतेल, तेल की धार बिकाऊ,जीत बिकाऊ,हार बिकाऊ,नीले ड्रम को भूल गए क्या,है दुनिया में प्यार बिकाऊ। बदले युग में यार
Read Moreचंचल चितवन कुसुमाकर मन और नयन स्वप्नों में,ढूँढ रहा है अपनापन, बेगानों और स्वजनों में।अपनों ने ही छोड़ दिया जब,
Read Moreमहाभारत के युद्ध से पहले कितने नियम बनाए,किंतु कौरव पक्ष ने वे सारे ही नियम भुलाए।माना कि युद्ध करने के
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