हम तुम जब साथ साथ हैं
हम तुम जब हैं साथ साथ तो,लोगों से क्या डरना है।राह सत्य की चलते रहना, काम सही जो करना है।
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Read Moreपेट की ये आग करा लेती है करतब कितने-कितने! देखने वाले अंगुलियाँ दबा लें दाँतों के तलेहै नहीं कोई घर
Read Moreगीत नहीं आते अधरों परआँखें जब दो रोती हैं।पेट भरा रहता है जिनका,बस उनसे यह होती हैं।खोज़ रहे दो रोटी
Read Moreबूँद मिली जब सिंधु में, मिटा बूँद का भान।मैं-तू का पर्दा गिरा, एक हुआ अरमान। नदिया बनकर चल पड़ी, मन
Read Moreकलम हुई मजबूर जब, बिकने लगा विचार।आका की चौखट बनी, लेखक का दरबार॥ कलम उठी जो प्रश्न पर, कर देते
Read Moreभगत सिंह की सोच को, रखना दिल के पास।देशप्रेम की ज्योति से, रोशन हो हर साँस।। माटी पर कुर्बान थे,
Read Moreजहाँ पर बीता मेरा बचपन, भूल गया अब उम्र है पचपन। नीम तले वो कंचे खेलना, अम्मा का वो रोटी
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