बादल है पर बूँद नहीं
बादल है पर बूँद नहीं, कैसी ऋतु की चाल।प्यासे मन की देह पर, सूखा हर इक ताल॥ धरा तड़पती देखिए,
Read Moreबादल है पर बूँद नहीं, कैसी ऋतु की चाल।प्यासे मन की देह पर, सूखा हर इक ताल॥ धरा तड़पती देखिए,
Read Moreपत्थर भी अपने चले, अपने ही थे हाथ।फिर कहते निर्दोष हैं, कैसी झूठी बात॥ आग लगाकर बस्तियाँ, करते ऊँची बात।आँसू
Read Moreधरती डोली एक पल, काँपे घर-दरबार।रोया सारा देश फिर, टूटा जन-आधार॥ मलबों में दबते रहे, कितने सपने-प्राण।भाषण देते रह गए,
Read Moreमार्क, सच मानो, मैं तुमसे ज़रा भी इत्तेफाक नहीं रखता,सांख्यिकी ज्ञान, सफेद झूठ के परे, दर्ज हो नहीं सकता॥ जन्म
Read Moreधैर्य धरो विपदा घड़ी, रखो हृदय में आस।पतझड़ के ही बाद तो, आता है मधुमास॥ घोर अँधेरा देखकर, होना नहीं
Read Moreएक घुटी-सी चीख है, सरयू तट की बात।बिन अपराधी श्रवण को, मार गया सम्राट॥राजमुकुट के तीर ने, कैसा किया प्रहार।बिन
Read Moreहम कच्चे से हैं घड़े, पिता कुशल कुम्हार।ठोक-पीटकर प्रेम से, देते सही आकार॥ सिर पर छाया बन खड़े, बने नीम
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