मुँह बाए प्यासी है धरती
मुँह बाए प्यासी है धरतीकरे मेघ की आस। तपता सूरज जेठ मास मेंसूख रहे द्रुम-बेलत्राहि-त्राहि मच रही धरा परजीव रहे
Read Moreमुँह बाए प्यासी है धरतीकरे मेघ की आस। तपता सूरज जेठ मास मेंसूख रहे द्रुम-बेलत्राहि-त्राहि मच रही धरा परजीव रहे
Read Moreनोट कहाँ कब बोलते, करते सिक्के शोर।केवल औछे लोग ही, दिखलाते हैं जोर।। धन-दौलत के मद फँसे, भूले सब व्यवहार,अहंकारों
Read Moreपीट रहे जो छाती हरदम, इनकी कथा सुनाता हूं,मोदी का हौआ है कैसा….आज तुम्हे बतलाता हूं। पवन खेड़ा कुत्ते सा
Read Moreकाश दिखावे छोड़कर, समझें माँ के घाव,जीते जी ही दे सकें, उसको अपना ठाँव॥ मातृत्व दिवस पर करें, माँ का
Read Moreमेरे अक्षर लेखनी, दिल के सब जज़्बात।तुमसे मेरे बाद भी, रोज करेंगे बात॥ स्याही में भीगें हुए, मन के सब
Read Moreममता की छाँव में, मिलता जग का मान,माँ के चरणों में सदा, बसता है सम्मान॥ आँचल की उस ओट में,
Read Moreछपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार,अब तो बिककर छप रहे, कलम है शर्मसार॥ सच की कीमत लग गई,
Read Moreजिनके पास हों एक से एक बढकरअत्यंत ही कुशल रणनीतिकारतब आगे भी ऐसे ही चमत्कारिकपरिणामों के लिए रहिये तैयार ।।
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