झूठों के दरबार में, सच बैठा है मौन
झूठों के दरबार में, सच बैठा है मौन,घेरे घोर उदासियाँ, सुनता उसकी कौन॥ मंचों पर सच हारता, झूठ करे अभिनंदन,सिक्कों
Read Moreझूठों के दरबार में, सच बैठा है मौन,घेरे घोर उदासियाँ, सुनता उसकी कौन॥ मंचों पर सच हारता, झूठ करे अभिनंदन,सिक्कों
Read Moreलगता खूब अजीब है, रिश्तों का संसार,अपने ही लटका रहे, गर्दन पर तलवार॥ चेहरों पर मुस्कान है, भीतर गहरा वार,मीठी
Read Moreपास रहते न जाने कब ये दूरी हो गई,ना जाने क्यूँ ये कहानी फिर अधूरी हो गई। समय के फेरों
Read Moreसमय तुम्हारा जो लगे, करने में श्रृंगार,स्वयं-ज्ञान में लग सके, हो नारी उद्धार॥ हे नारी, पहचान तू, अपने मन का
Read Moreकिस क़दर टूटा हूँ, तुमको क्या बताऊँ,जिस्म छलनी छलनी, तुमको कैसे बताऊँ? जबसे दी तुमने क़सम भूलने की,दिया था वास्ता
Read Moreवक्त बदलता दे रहा, कैसे-कैसे घाव,माली बाग़ उजाड़ते, मांझी खोए नाव॥ अपनों से अपने नहीं, रखते आज लगाव,रिश्तों की हर
Read Moreगूंगे थे, अंधे बने, सुनती नहीं पुकार,धृतराष्ट्रों के सामने, गई व्यवस्था हार॥ सत्ता के गलियार में, गूंजे केवल शोर,सत्य यहाँ
Read Moreरोज मर्रा की इस भाग दौड़ मेंबनावटी पन के इस विकट दौर मेंज़िन्दगी तू किस मोड़ पर आ फंसीकहां खो
Read Moreमंच हुए साहित्य के, गठजोड़ी सरकार,सभी बाँटकर ले रहे, पुरस्कार हर बार॥ कला नहीं अब माप है, संबंधों का जाल,योग्यता
Read Moreजबलपुर की लहर में, भरी समंदर पीर,ममता का वह रूप था, ईश्वर की तस्वीर॥ क्रुज की उस चीख में, गूँजी
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