चाहा उन्हें समुद्र दें, वे निकले बदहाल
चाहा उन्हें समुद्र दें, वे निकले बदहाल।तालाबों में बिक गई, उनकी सारी चाल॥ जिनको सींचा प्रेम से, देकर अपना खून,वही
Read Moreचाहा उन्हें समुद्र दें, वे निकले बदहाल।तालाबों में बिक गई, उनकी सारी चाल॥ जिनको सींचा प्रेम से, देकर अपना खून,वही
Read Moreसुख-दुख तो हैं आते-जाते, जीवन पथ संगीत सुनाते।समझ इसे हम सब कब पाते, बाद बहुत नाहक पछताते।। इसका जीवन खेल
Read Moreजब से आई गाँव में, ये शहरी सौगात।मेड़ करें ना खेत से, आपस में अब बात।। पीपल वाली छाँव भी,
Read Moreतू भी पायेगा कभी, फूलों की सौगात।धुन अपनी मत छोड़ना, सुधरेंगे हालात॥ काँटों वाली राह में, रखना मन विश्वास,मेहनत की
Read Moreनन्हे पग की चंचलता, भैया की मुस्कान,घर के छोटे आँगन में, बसता सारा जहान॥ बिस्तर बन गया खेलघर, हँसी बनी
Read Moreतीस दिनों के दर्द में, बने न जिसकी ढाल।उससे चाहो उम्र भर, सेवा फिर हर हाल।। जननी बनते ही नहीं,
Read Moreजिनके सिर है पाप की, ब्याज समेत उधार।बनकर साहूकार वो, करने चले सुधार।। खुद दलदल में धँस चुके, दें जग
Read Moreनस्ल देखकर ही रखें, ताल्लुक़ अब हर हाल।दिमाग शिक्षा ने दिए, जमीर हुए हलाल।। चेहरों पर तहज़ीब है, भीतर गहरा
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