व्यंग्य – देवासुर संग्राम
इस देश में कोई कितना ही बड़ा आतताई हो,मानवता का नृशंस हत्यारा हो,मानव देह में साक्षात राक्षस ही क्यों न
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Read Moreकमाल की आज़ादी है हमारी! अंग्रेज़ों को भगाने के बाद हमने गुलामी के इतने नए दरवाज़े खोल लिए कि अब
Read Moreकभी मौका मिले तो चुगली करके देखिए कितना सकून मिलता है। हृदय तरोताजा हो जाता है जैसे-अभी अनार का जूस
Read Moreबाल मंच दक्षिण भारत ईकाई की अगस्त माह की काव्य गोष्ठी संस्था के संस्थापक आदरणीय डॉ. नरेश नाज़ सर के
Read Moreअगर आप लेखक हैं और आपको पड़ोसी तक नहीं जानता है कि आप लेखक हैं तो बहुत दुख की बात
Read Moreहमारे एक मित्र कार का ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने गए, सामने लंबी कतार देख घबरा कर लौट आए।बोले, अरे भाई बहुत
Read Moreडॉ. अनुराधा प्रियदर्शिनी हिंदी साहित्य का एक जाना पहचाना नाम है। अपनी कहानियों, कविताओं, गीतों संस्मरणों, लघुकथाओं के साथ-साथ वे
Read Moreसर्वत्र व्याप्त मोबाईल और उसका रोना है। यह एक ऐसा है यंत्र, जिसने कर दिया इंसान को मुग्धमंत्र? ठेठ हिंदी
Read Moreआनलाइन मिलने वाली साड़ी की तस्वीर देखकर हरिमोहन की पत्नी का हृदय गदगद हो गया। मन मयूर हो उठा। कितनी
Read Moreसाहित्य हितकारी होता है। “हितेन् सहितम् इति साहित्यम्” यह साहित्य की मूल परिभाषा है और जो साहित्य हितकारी नहीं होता
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